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Dehradun News: संवाद में रखी विकास की नई नींव, युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक बने साक्षी

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Iसंवाद के मंथन में निकला विचारों का अमृत, युवाओं ने कहा यह अमृत जीवन को देगा नई दिशाI
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उत्तराखंड के विकास को लेकर सुबह से विभिन्न विशेषज्ञ सत्रों में संवाद प्रारंभ हो गया। धर्म आध्यात्म के जरिए जीवन में शांति लाने से शुरू हुई चर्चा प्रदेश के विकास, राजनीति, औद्योगिक विकास, खेल के सत्रों से होती हुई फिल्म अभिनेता जॉन अब्राहम के सत्र पर आकर समाप्त हुई। हर सत्र में विभिन्न क्षेत्रों की नामचीन हस्तियां शामिल हुईं। वक्ताओं ने हर क्षेत्र में राज्य को आगे बढ़ाने के लिए बेबाक राय रखी। विशेषज्ञों ने कहा कि उत्तराखंड में अपार संभावनाएं हैं। खेल हो या फिल्म, धर्म आध्यात्म हो या शिक्षा का क्षेत्र, हर क्षेत्र के लिए उत्तराखंड बेहद मुफीद है। भविष्य की नई संभावनाओं को तलाशते हुए विकास के नए संकल्प इस आयोजन में लिए गए। युवाओं से लेकर बुजुर्ग एवं महिलाएं सभी इस संकल्प के साक्षी बने।

अमर उजाला संवाद का आयोजन बेशक देहरादून के होटल सरोवर प्रीमियर में किया गया था, लेकिन आयोजन में प्रदेश भर से लोग पहुंचे। देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, ऋषिकेश, विकास नगर, उत्तरकाशी के अलावा कई जिलों से विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग कार्यक्रम में पहुंचे। उद्योग संगठन, सामाजिक संगठन, पूर्व सैनिक संगठन, टीचर्स एसोसिएशन, रिटायर्ड पेंशनर्स, महिला संगठन से लेकर धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग कार्यक्रम में 8 बजे से ही पहुंचने लगे। बारिश भी श्रोताओं का उत्साह कम नहीं कर सकी। बारिश के बीच खचाखच भरा हाल गवाह बना कि राज्य की जनता उत्तराखंड के विकास को लेकर कितनी गंभीर है। इसीलिए सुबह से लेकर कार्यक्रम के अंत तक आयोजन स्थल पर श्रोताओं ने गंभीरता के साथ विशेष वक्ताओं के विचारों को सुना।
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Iसत्र बदलते रहे, कम नहीं हुआ श्रोताओं का उत्साहI
होटल सरोवर का नजारा रविवार को बदला हुआ था। गेट के बाहर से लेकर अंदर तक गाड़ियों की कतार आयोजन की सफलता को बयां कर रही थी। राज्य भर के गणमान्य नागरिक और प्रदेश के विकास की इबारत लिखने वाला हर चेहरा हाॅल में नजर आ रहा था। एक के बाद एक सत्र का आयोजन होता रहा, लेकिन श्रोताओं का उत्साह कमजोर नहीं पड़ा। पहले सत्र में स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज से लेकर अमोघ लीला प्रभु के विचार सुनने को लेकर उत्साह रहा तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आगमन पर उत्साह और भी बढ़ गया, लेकिन यह किसी भी सत्र में कमजोर नहीं पड़ा। पैरा ओलंपिक खिलाड़ियों की कहानी सुनकर तो हर किसी के रौंगटे खड़े हो गए। उधर जॉन अब्राहम के सत्र को लेकर उत्साह अंतिम पलों तक कायम रहा।
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Iपैरा खिलाड़ियों की खुशी का नहीं रहा ठिकानाI

संवाद में हर वर्ग के लोग पहुंचे, लेकिन भारतीय पैरालंपिक खिलाड़ी डॉ. दीपा मलिक, देंवेंद्र झाझरिया व मुरलीकांत पेटकर को सुनने के लिए दून समेत आसपास के इलाकों से पैरा खिलाड़ी भी पहुंचे। अपनी प्रेरणा और आदर्श खिलाड़ियों को अपने बीच पाकर पैरा खिलाड़ियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पैरालंपिक खिलाड़ियों ने भी अपनी कहानियों के जरिए खूब उत्साह भरा। डॉ. दीपा मलिक ने कहा कि जज्बा बनाकर रखिए, जो लोग आपको दिव्यांग कहते हैं, वही कल आप पर गौरवान्वित होंगे। वहीं उन्होंने उत्तराखंड के दिव्यांग बच्चों के मैदान बनाने का संकल्प दोहराया तो हाल तालियों से गूंज उठा। वहीं फ्रीस्टाइल तैराकी में पहला पैरालिंपिक स्वर्ण पदक दिलाने वाले पद्मश्री मुरलीकांत पेटकर ने जब बताया कि उनकी रीढ़ की हड्डी में आज भी एक गोली है, तो हर कोई हैरान रह गया। मुरलीकांत पेटकर के जीवन पर बनी फिल्म चंदू चैंपियन के कारण हर कोई उनकी कहानी जानने को उत्साहित रहा।
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