टेंडर और सरकारी काम दिलाने के नाम पर पंजाब के लोगों को ठगने के आरोपी उपाध्याय के साथी सौरभ वत्स को डीजीपी ने तत्काल गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं। डीजीपी ने कहा कि इससे पहले कि वह फरार हो जाए उस पर तत्काल प्रभाव से शिकंजा कसा जाए। उसकी संपत्तियों के जांच के आदेश भी डीजीपी ने दिए हैं। साथ ही आरोपियों के खिलाफ अन्य शिकायतों पर भी तत्काल मुकदमा दर्ज करने को कहा गया है।
बता दें कि मुख्यमंत्री के पूर्व निजी सचिव प्रकाश चंद उपाध्याय समेत सात आरोपियों के खिलाफ साढ़े तीन करोड़ रुपये की ठगी करने का मुकदमा दर्ज किया गया है। यह ठगी उन्होंने पंजाब के पटियाला निवासी कारोबारियों से की है। उन्हें सरकारी काम दिलाने का झांसा दिया गया था। इस ठगी में उपाध्याय का मुख्य साथी सौरभ वत्स है। वत्स के खिलाफ 2016 में भी एक मुकदमा दर्ज किया गया था। तब उसने खुद को मुख्यमंत्री का निजी सचिव बताकर कारोबारियों से लाखों रुपये की ठगी की थी। उस वक्त उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया था।
सोमवार को डीजीपी अशोक कुमार ने जिला पुलिस को इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। डीजीपी ने कहा कि इससे पहले कि वत्स भाग जाए उसे गिरफ्तार किया जाए। पता चला कि उसने ठगी के पैसे से बहुत सी संपत्तियां अर्जित की हैं। इनकी भी जांच की जाए। सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई करने के लिए भी निर्देश दिए हैं।
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10 अगस्त की शिकायत पर अब भी मुकदमा नहीं
इस मामले से जुड़े राजन पराशर निवासी पटियाला ने गत 10 अगस्त को डीजीपी अशोक कुमार को शिकायत की थी। इस शिकायत को उसी दिन देहरादून पुलिस के पास भेज दिया गया था। इसके बावजूद अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। पराशर और उनके साथियों के साथ भी डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी हुई है।
कहीं मित्तल जैसी गलती न कर बैठे पुलिस
इस मामले में अब तक की जांच को देखकर पुलिस की कार्रवाई बेहद धीमी लग रही है। ऐसे में अंदेशा इस बात का है कि पुलिस इसमें भी बिल्डर दीपक मित्तल जैसी गलती कर सकती है। शुरूआत में जब पुष्पांजलि के मालिक दीपक मित्तल के खिलाफ करोड़ों की धोखाधड़ी का मुकदमा हुआ तो उसने वापस आकर सारी रकम लौटाने की बात कही थी। पुलिस उस वक्त उसकी बातों में आ गई। इसके बाद जब वह विदेश से लौटा तो उसके हाथ में कोर्ट का स्टे ऑर्डर था। अब पुलिस चाहकर भी उसके खिलाफ कुछ नहीं कर पाई।