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Dehradun News: मालसी तक विकास को पहुंचने में लगेगा वक्त

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- ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, सफाई, नाले नालियों की समस्या से जूझ रहे लोग

- दस गांवों को शामिल कर वर्ष 2018 में बनाया गया था मालसी वार्ड

नगर निगम में वर्ष 2018 में शामिल किए गए मालसी में अभी शहरी क्षेत्र जैसी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। इस वार्ड में मसूरी रोड से सटा मैक्स अस्पताल से कोल्हूखेत तक वीआईपी क्षेत्र तो शामिल है ही वहीं, मालसी, सिनौला, बगरियाल गांव जैसे बड़े गांव भी शामिल हैं। मसूरी रोड से सटे क्षेत्रों में तो सुविधाएं भरपूर हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी तक पेयजल, साफ-सफाई, नाले, नालियों, स्ट्रीट लाइटों की समस्या पूर्व की भांति बनी हुई है। अधिकांश क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण शहरी क्षेत्र जैसी सुविधाएं पहुंचने में अभी भी वक्त लगेगा।



मालसी वर्ष 2018 से पहले ग्राम पंचायत मालसी का हिस्सा हुआ करता था। मालसी, सिनौला, बगरियाल गांव, मक्कावाला, कुठालगेट, खाला गांव, कोल्हूखेत जैसे करीब दस गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया था। उस समय करीब इस वार्ड की जनसंख्या सात हजार के करीब थी। लेकिन पिछले पांच साल में यहां मसूरी रोड पर मैक्स अस्पताल से कोल्हूखेत तक बड़ी-बड़ी सोसायटी का निर्माण हो चुका है।
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इसलिए मसूरी रोड से सटा क्षेत्र तो काफी विकसित हो चुका है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी पहली जैसी समस्या बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लोग पेयजल, सफाई, नाले, नालियों, स्ट्रीट लाइटों की समस्या से जूझ रहे हैं। अधिकतर क्षेत्र पर्वतीय होने के कारण भूस्खलन की समस्या भी इस क्षेत्र की प्रमुख समस्या है।



बड़ी-बड़ी सोसायटी बिगाड़ रही क्षेत्र की फिजां



मालसी वार्ड का करीब 64 प्रतिशत क्षेत्र वन क्षेत्र है। पांच साल के अंतराल में वार्ड के मसूरी रोड से सटे क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी सोसायटी, स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, होटल बन चुके हैं। इसकी वजह से क्षेत्र का विकास तो हो रहा है, लेकिन फिजां में भी जहर घुल रहा है। कई सोसायटी बिना एसटीपी के बने हैं। जिनके पास है वह भी एसटीपी का पानी नदियों में प्रवाहित कर रहे हैं। इससे नदियां प्रदूषित हो रही हैं।

क्या कहना है क्षेत्रवासियों का



वार्ड में सबसे बड़ी समस्या नाले-नालियों की है। नालियां न होने के कारण लोगों के घरों का गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। जिससे परेशानी का सामना करना पड़ता है। -विवेक गुप्ता

सिनौला गांव में सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। यहां बिना मोटर के पानी नहीं आता है। गर्मियों में तो उन्हें खुद पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। तब जाकर काम चलता है। -कमल राणा

जब उनका गांव नगर निगम में शामिल हुआ तो लगा कि कई सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन आज भी जो सुविधा पहले थी वहीं है। न तो सफाई होती है और न ही नाले-नालियां बनी हुई है। आज भी स्ट्रीट लाइट नहीं है। -उर्मिला, देवी
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वार्ड का अधिकांश क्षेत्र ग्रामीण और पहाड़ी है, जहां मूलभूत सुविधाएं, नाली, नाले, सीवर पहुंचने में वक्त लगेगा। जिन क्षेत्रों में पेयजल की किल्लत है, वहां नई लाइन बिछाई जा रही है। जो समस्याएं हैं उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। -सुमेंद्र सिंह बोहरा, निवर्तमान पार्षद मालसी
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