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Dehradun News: स्कूलों के कायाकल्प की ठानी, निजी संसाधनों से लिख दी कहानी

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जितेंद्र जोशी
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ऋषिकेश। जीवन में सफल होने के लिए अपना घर गांव छोड़कर महानगरों में बसने वाले लोगों के दिल में एक कसक रहती है। लेकिन, अगर युवा अपनी मिट्टी के लिए कुछ करने की ठान लें तो यह कसक परिवर्तन की लहर बन जाती है। ऐसा ही कुछ मल्टीनेशनल कंपनी के क्षेत्रीय मैनेजर आशुतोष कंडवाल और उनकी टीम ने कर दिखाया।
पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर के कुलेथ गांव निवासी आशुतोष कंडवाल दिल्ली में एमएपीईआई कंपनी में क्षेत्रीय प्रबंधक हैं। आशुतोष ने बताया उनके बॉस संजय भल्ला, पत्नी अंकिता टोडरिया, बहन शिवानी काला और दोस्त की पत्नी मेघा भट्ट मिलकर पर्वतीय क्षेत्रों के आम जनमासन के जीवन में बदलाव लाना चाहते थे। बताया कि शिक्षा किसी भी समाज के उत्थान में सबसे बड़ा कारक होता है। बताया कि सभी ने अपने निजी संसाधनों से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के स्कूलों के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया।
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बताया कि दिसंबर 2020 में यमकेश्वर के स्कूलों के कायाकल्प की शुरुआत की गई। टीम ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय गणेशपुर, राजकीय हाईस्कूल तूनखाल, हीराखाल राजकीय इंटर कॉलेज, पूर्व माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालय तालबंदनी की मरम्मत और सौंदर्यीकरण का कार्य किया। इसमें करीब 45 लाख रुपये का खर्च आया। इस खर्च को सभी ने निजी संसाधनों से वहन किया। उनकी कंपनी एमएपीईआई ने भी सीएसआर फंड से मदद की। बताया कि अब सभी लोगों ने योजना को आगे बढ़ाने के लिए घुघुती बसूती फाउंडेशन बना लिया।
केवल रंग-रोगन ही नहीं किया
- आशुतोष कंडवाल ने बताया कि केवल ऊपरी तौर पर स्कूलों का सौंदर्यीकरण और मरम्मत नहीं की गई। पहले स्कूलों के कॉलम बीम की मरम्मत कराई गई। उसके बाद प्लास्टर और नवीनतम तकनीक से छत की वॉटर प्रूफिंग की गई। स्कूलों के कमरों और एपेक्स पेंट किया गया। लोहे के नए दरवाजे, खिड़कियां लगाने के साथ शौचालय का निर्माण और मरम्मत कराई गई।
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कौशल विकास के लिए आईआईटी में प्रशिक्षण
- आशुतोष ने बताया कि घुघुती बसूती फाउंडेशन आईआईटी रुड़की के माध्यम से यमकेश्व क्षेत्र के इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने वाले 20 छात्र-छात्राओं को कौशल विकास प्रशिक्षण दिलवाने की तैयारी कर रही है। बताया कि इसमें सीबीआरई से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे। बताया कि छात्र- छात्राओं को पेवर टाइल, वेल्डिंग, मोल्डिंग, रोड निर्माण और सिविल निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बताया कि यह प्रशिक्षण पूरी तरह से निशुल्क होगा।
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