डेंगू का स्ट्रेन डी-2 लोगों की जान ले रहा है। डेंगू का रूप लगातार भयावह हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू किडनी, लिवर और फेफड़ों पर अटैक कर रहा है। इस साल अब तक जिले में 13 मरीजों की मौत हो चुकी है। दून में डेंगू के सबसे घातक स्ट्रेन डी-2 की पुष्टि हुई है। दून मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबॉयोलॉजी लैब में डेंगू एलायजा पॉजिटिव के बाद सीरोटाइप आरटीपीसीआर जांच जिन सैंपलों की हुई, उनमें 95 फीसदी में डी-2 स्ट्रेन मिला है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
डेंगू मरीज की मौत इस पर भी निर्भर करती है कि वेरिएंट कौन सा है। इस बार स्ट्रेन डी-2 अधिक है। इस वजह से प्लेटलेट्स तेजी से कम हो रही हैं। मरीज को डिहाइड्रेशन हो रहा है। शॉक सिंड्रोंम होने पर मल्टीपल ऑर्गन फेलियर हो जाता है। डेंगू शॉक सिंड्रोम का कोई इलाज नहीं है। इसमें मरीज की मौत हो सकती है। -
डॉ. नारायणजीत सिंह, विभागाध्यक्ष, मेडिसिन विभाग दून अस्पताल
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दोबारा डेंगू होने पर एंटीबॉडी क्रॉस रिएक्ट करती है। दूसरी बार में स्थिति गंभीर हो जाती है। अगर गर्भवती मां को गर्भावस्था में डेंगू हुआ है तो नवजात को हो सकता है। -
मेजर डॉ. गौरव मुखीजा, एसोसिएट प्रोफेसर बाल रोग विभाग, दून अस्पताल
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यह पोस्ट कोविड का समय है। लोग बुखार को लेकर डरे हुए हैं। डेंगू होने पर लोग बकरी का दूध, पपीते के पत्ते या घरेलू उपाय कर हालत खराब कर रहे हैं। इनके अलग-अलग सीरोटाइप होते हैं। एक बार में एक अटैक करता है तो दूसरी बार में दूसरा अटैक कर रहा है। -
डॉ. एनएस बिष्ट, अस्सिटेंट प्रोफेसर, इमरजेंसी मेडिसिन दून अस्पताल
डेंगू होने के तीन से चार दिन बाद शरीर में प्लेटलेट्स कम होने लगती हैं। इस बार स्ट्रेन की वजह से स्थिति गंभीर हो रही है। -
डॉ. विकास अवस्थी, एमडी मेडिसिन, वरिष्ठ सलाहकार कैलाश अस्पताल
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बारिश के बाद डेंगू बढ़ रहा है। अब तक जिनकी जान गई हैं युवा ज्यादा हैं। डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से कम होने पर डेंगू शॉक सिंड्रोंम का खतरा रहता है। शरीर से ब्लीडिंग हो जाती है। डेंगू होने के बाद अगर प्लेटलेट्स 20 हजार से कम हैं तो दिन में दो बार और अगर 40 हजार के आसपास हैं तो दिन में एक बार प्लेटलेट्स की जांच जरूर करवाएं। -
डॉ. अंकित पाराशर, आईएमए सचिव