वरिष्ठ इतिहासकार, साहित्यकार
डॉ. योगंबर बर्त्वाल का सोमवार को निधन हो गया। 75 वर्षीय डॉ. योगंबर डेंगू पॉजिटिव थे और कैलाश अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से मौत की पुष्टि नहीं की है, लेकिन कैलाश अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक वह डेंगू पॉजिटिव थे।
कैलाश अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि अस्पताल में डॉ. योगंबर बर्त्वाल 24 अगस्त को भर्ती हुए थे। इसके बाद डेंगू एलाइजा जांच हुई थी जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। हालांकि इन्हें सांस, किडनी, डायबिटीज की समस्या भी थी। 28 अगस्त को सुबह अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दून अस्पताल से सेवानिवृत्त डॉ. योगंबर बर्त्वाल के निधन पर सीपीएम, उत्तराखंड पीपुल्स फोरम, एसएफआई सहित विभिन्न राजनैतिक सामाजिक संगठनों ने शोक व्यक्त किया है। बर्त्वाल तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण तिवारी के चिकित्सा सलाहकार भी थे। शारीरिक रूप से विकलांगता कभी उनकी सामाजिक एवं साहित्य रचना यात्रा में आढ़े नहीं आई। दो पांडुलिपियों के लेखक डॉ. बर्तवाल ने लगभग 300 दुर्लभ पत्र, डायरियां भारत सरकार के रिकॉर्ड में भी दर्ज किए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने अबतक सिर्फ एक मरीज की मौत की पुष्टि की
डेंगू के नोडल एसीएमओ डॉ. सीएस रावत का कहना है कि अभी हमारे पास रिपोर्ट नहीं आई है। जांच के बाद ही डेंगू मरीज की मौत की पुष्टि होगी। बता दें कि इसके पहले महिला रंगकर्मी की मौत भी निजी अस्पताल में हुई थी और उन्हें अस्पताल की ओर से डेंगू पॉजिटिव बताया गया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू मानने से इंकार कर दिया था। जिले में अबतक सिर्फ एक डेंगू मरीज की मौत की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने की है।