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Dehradun News: नाम का डेंगू आइसोलेशन वार्ड, मरीजों को नहीं मिल रहा उपचार

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प्लेटलेट्स कम होने पर मरीजों को किया जाता है रेफर



मजबूरी में मरीज निजी अस्पतालों का कर रहे रुख

उप जिला अस्पताल में मरीजों के लिए डेंगू आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है, लेकिन इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में प्लेटलेट्स यूनिट उपलब्ध नहीं है। प्लेटलेट्स कम होने पर चिकित्सक मरीज को सीधा हायर सेंटर रेफर कर देते हैं। यही कारण है कि डेंगू के संदिग्ध मरीज मजबूरी में उप जिला अस्पताल की बजाय निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।

जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या 300 का आंकड़ा पार कर चुकी है। डेंगू संक्रमितों की संख्या बढ़ने के साथ स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है, लेकिन विभाग की सतर्कता पर सरकारी अस्पतालों में संसाधनों का अभाव भारी पड़ रहा है। उप जिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर छह बेड का डेंगू आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया था। वार्ड बनने के बाद मरीजों को उम्मीद थी अब डेंगू का उपचार जेब पर भारी नहीं पड़ेगा।
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अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे डेंगू के संदिग्ध लक्षण से ग्रस्त मरीजों की उम्मीद टूट रही है। अस्पताल में डेंगू की प्लेटलेट्स यूनिट बनाने की व्यवस्था नहीं है। ब्लड बैंक में खून से कंपोनेंट अलग करने के दौरान प्लेटलेट्स यूनिट बनाई जाती है, लेकिन उप जिला अस्पताल में ब्लड बैंक ही नहीं है। डेंगू के सामान्य मरीजों का ओपीडी में उपचार हो जाता है, अगर मरीजों की प्लेटलेट्स कम होती है तो अस्पताल के चिकित्सकों के पास मरीज को रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है।
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अस्पताल में छह बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। अस्पताल में ब्लड बैंक नहीं है। अगर डेंगू के मरीज की प्लेटलेट्स कम होती है तो उसको प्लेटलेट्स यूनिट की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में मरीजों को रेफर किया जाता है।

- डॉ. विजय कुमार, प्रभारी उपजिला अस्पताल, विकासनगर
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