गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों गुरुकुल कांगड़ी के स्थापक स्वामी श्रद्धानंद को भारत रत्न दिए जाने की मांग की है।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए विद्यालय के मुख्य अधिष्ठाता डॉ. दीनानाथ शर्मा ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद महाराज ने 1902 में गुरुकुल कांगड़ी विवि की स्थापना कांगड़ी गांव में की थी। उस समय स्वामी श्रद्धानन्द महाराज ने अंग्रेजों से लोहा लेते हुए भारत की संस्कृति और सभ्यता की रक्षा करते हुए गुरुकुल में ब्रह्मचारियों को तैयार किया। गुरुकुल और आर्य समाज के हजारों लोगों ने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया। ऐसे में आर्य समाज के पुरोधा स्वामी श्रद्धानंद महाराज को भारत रत्न मिलना चाहिए।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. विजेंद्र शास्त्री ने कहा कि देश की आजादी में स्वामी श्रद्धानंद महाराज अहम भूमिका रही है। देश की आजादी में आर्य समाज की ओर से चलाया गया स्वतंत्रता आंदोलन किसी से छिपा नहीं है। बैठक का संचालन करते हुए शिक्षक डॉ. योगेश शास्त्री ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद महाराज को बहुत पहले ही भारत रत्न मिल जाना चाहिए था। देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वाले स्वामी श्रद्धानंद आर्य समाज के पहले संत हैं। जिन्होंने समाज के उत्थान, शिक्षा और हिंदुत्व की रक्षा के लिए अपनी जान की आहुति दे दी थी। बैठक में अशोक कुमार, डॉ हुकुम सिंह, डॉ. ब्रजेश कुमार, वेद पाल सिंह, विजय कुमार, अमित कुमार, राज कमल सैनी, दीप कमल, लोकेश, टीकम सिंह, सज्जन कुमार, अशोक कुमार, गौरव कुमार आदि मौजूद थे। संचालन डॉ. योगेश शास्त्री ने किया।