पुलिस के मुताबिक, गिरोह से जुड़े आरोपी चोरी से पहले बाबा के भेष में शनिदान और भिक्षावृत्ति का काम करते हैं। इसी दौरान लोगों के घरों की रेकी करते हैं। अक्सर बस्तियों के बाहरी क्षेत्रों के घरों को चिह्नित करते हैं और फिर अपने घर चले जाते हैं। जिस दिन घटना करनी होती है, योजना के मुताबिक वे अपने घर से तीन-चार बजे तक आईएसबीटी पहुंचते हैं। वहां से टैंपो पकड़कर संबंधित क्षेत्र के आउटर एरिया तक जाते हैं। इसके बाद आसपास के जंगल में छिपकर रात का इंतजार करते हैं। रात करीब 12 से एक बजे के बीच बाहर निकलकर चिह्नित घरों में वारदात को अंजाम देते हैं और फिर जंगल में छिप जाते हैं। सुबह जब लोग सैर पर निकलते हैं, उनके साथ अलग-अलग आईएसबीटी पहुंचकर निकल जाते हैं।
नहीं करते मोबाइल का इस्तेमाल, इसलिए पकड़ना मुश्किल
फौजी गिरोह के आरोपी मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इसलिए पुलिस को उन्हें पकड़ने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। एसओ सेलाकुई प्रदीप रावत ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करते। न ही सीसीटीवी कैमरे की रेंज में आते हैं। जिस क्षेत्र में उन्हें वारदात करनी होती है, वहां मुख्य बाजारों से दूर ऐसे सुनसान स्थान पर जहां सीसीटीवी कैमरे न लगे हों, वहां उतरते हैं और जंगल में चले जाते हैं। इन सभी घटनाओं की जांच पुलिस को मैन्युअली करनी पड़ी। क्योंकि, सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस से पता नहीं चल पाया।
जंगल में फेंक देते हैं अपने साथ लाए हथियार
गिरोह के आरोपी अक्सर अपने पास पेचकश, प्लास आदि हथियार रखते हैं। इन्हें घटना के बाद जंगल में ही फेंक देते हैं ताकि उन पर कोई शक न करे। वारदात करते समय भी पेचकश पर कपड़ा बांधकर लोगों को बंदूक बताकर डराते हैं।
निंबस एकेडमी में हुई लूट में भी शामिल
आरोपियों ने जुलाई में हुई लूट और चोरी की घटनाओं के साथ ही जनवरी में प्रेमनगर स्थित निम्बस एकेडमी में कर्मचारी को बंधक बनाकर लाखों की लूट में भी अपना हाथ कबूला है। बताया कि इस घटना के बाद वे शांत हो गए थे। पुलिस के मुताबिक इनमें से फौजीनाथ वर्ष 2021 में रायवाला में हुई चोरी की घटना में वांछित है। आरोपी गौरव वर्ष 2021 में कोटद्वार थाने से चोरी के आरोप में जेल जा चुका है।