बीमित धनराशि से ऋण समायोजित कर लिया जाएगा। उन्हें केवल मूल धनराशि अदा करनी है। मधु गुप्ता ने उसी समय शेष राशि अदा कर दी। उस समय कई काग़जातों पर उनके साइन भी कराए गए थे। ऋण पूरा हुआ। उसके बाद कोई पत्राचार नहीं हुआ।
तीन फरवरी 2020 को फाइनेंस कंपनी का एक नोटिस फिर मिला। इसमें कहा गया कि मेरे पति ने 16 दिसंबर 2019 को एक चेक देनदारी स्वीकारते हुए प्रदान किया था। लेकिन, चेक का भुगतान नहीं हो पाया है। जबकि, पति संजीव गुप्ता की मौत वर्ष 2015 में हो गई थी। ऐसे में वर्ष 2019 में वह कैसे चेक जारी कर सकते हैं। पुलिस ने दस्तावेजों में हेराफेरी करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।