रजिस्ट्रार कार्यालय में फर्जीवाड़ा कर जमीनों की खरीद फरोख्त में आरोपी अधिवक्ता कमल विरमानी की जमानत याचिका पर कोर्ट में शुक्रवार को जोरदार बहस हुई। पुलिस ने कोर्ट से विरमानी की दो दिन के लिए कस्टडी रिमांड मांगी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला शनिवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया।
बचाव पक्ष की दलील थी कि विरमानी के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य पुलिस के पास नहीं हैं। उन्हें केवल जुबानी बयानों के आधार पर ही गिरफ्तार किया गया है। जबकि, अभियोजन ने पुलिस के पास मजबूत साक्ष्य होने की बात कही।
इस मामले में अधिवक्ता कमल विरमानी के नाम की चर्चा करीब 15 दिन पहले से होने लगी थी। इसी बीच विरमानी ने कोर्ट से अग्रिम जमानत भी मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद विरमानी ने कोर्ट में सरेंडर करना चाहा। लेकिन, पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उन्हें अभी मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। इसी उठापठक के बीच पुलिस ने गत शनिवार को विरमानी को गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट ने उनकी न्यायिक हिरासत भी मंजूर कर दी। इसके बाद विरमानी की ओर से गत सोमवार को कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। इस पर अभियोजन की ओर से तैयारियों के लिए दो दिन का वक्त मांगा गया था। लेकिन, रक्षाबंधन की छुट्टी होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।
पुलिस कसमें लेकर कर रही काम
शुक्रवार को सीजेएम लक्ष्मण सिंह की कोर्ट में इस याचिका पर बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता एसके धर और पूर्व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने बहस की। मनमोहन कंडवाल ने अपने अंदाज में कहा कि पुलिस इस मामले में कसमें लेकर काम कर रही है। मानो किसी ने कह दिया कि मां कसम विरमानी आरोपी हैं। बस इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। जबकि, पुलिस के पास उनकी गिरफ्तारी के लिए कोई ऐसे साक्ष्य नहीं हैं जिसमें उनके शामिल होने की बात हो। केवल जो आरोपियों ने कहा उसी के आधार पर कार्रवाई कर दी। इस पर अभियोजन ने कहा, यदि विरमानी ने कुछ नहीं किया था तो वह पहले से ही जमानत लेने क्यों पहुंच गए थे। इसके बाद आत्मसमर्पण का प्रार्थनापत्र भी लगाया। इससे पुलिस का शक और गहरा हो गया। इस बहस के बाद कोर्ट शनिवार को अपना फैसला सुनाएगी।