जैन धर्म का महान पर्व दशलक्षण पर्व शहर के जैन मंदिरों में श्रमणोपाध्याय 108 विकसंतसागर मुनिराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। मंदिरों में पूजा-अर्चना, प्रक्षाल, शांति धारा भक्तिभाव के साथ किया गया। इसके बाद सांध्यकालीन बेला में श्रीजी की आरती की गई।
सोमवार को गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला, माजरा, राजपुर, क्लेमेंटटाउन, झंडा मंदिर में कार्यक्रम हुआ। जैन भवन में कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षा महानिदेशक झरना कमठान ने किया। यहां श्रीजी की भक्ति के लिए मंदिर की घंटियों से वातावरण गूंज उठा। विकसंत सागर मुनिराज ने कहा कि जब सब कुछ क्षणभंगुर है, टिकने वाला नहीं है तो किसका घमंड करना और किस बात की दीनता माननी। कहा, जब सभी जीवों के पास समान रूप से अनंत गुण हैं तो किसी में भी क्या विशेषता रही। यहां शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
इस दौरान बच्चों ने जैन धर्म के शिक्षाप्रद गीतों के माध्यम से सुंदर प्रस्तुति दी। इस अवसर पर प्रधानाचार्या डॉ. शुभि गुप्ता, मनीष जैन, संजय जैन, संयोजक संदीप जैन, अमित जैन, अर्जुन जैन, अजीत जैन, मधु जैन, सचिन जैन, सुनील जैन आदि मौजूद रहे।