आपदा प्रभावित सरखेत गांव तक तो प्रशासन किसी तरह राहत पहुंचा रहा है, लेकिन इससे आगे कई गांवों के लोग सड़कें टूटने से घरों में कैद हो गए हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में अदरक, आलू, प्याज, टमाटर की खेती होती है। मंडी तक न पहुंचने के कारण ये फसलें खराब होने लगी हैं।
बांदल घाटी में सरखेत से आगे घंतू का सेरा, डूमकोट, टापूसेरा, ताछिला, चमरोली में भी अतिवृष्टि से लोगों के खेत, मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। संपर्क मार्ग भी तबाह होने से ये गांव अन्य क्षेत्रों से कट गए हैं। चार दिन बाद भी यहां तक कोई मदद नहीं पहुंची है। न तो यहां बिजली है और न पानी।
लोगों के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। आवाजाही ठप होने से फसलें भी खराब होने लगी हैं। क्योंकि, सरखेत से आगे स्थित दर्जनों गांवों को दून से जोड़ने के लिए मालदेवता सड़क ही एक विकल्प है। अभी तक यह बहाल नहीं हो पाया है। इन क्षेत्रों में आलू, प्याज, लहसुन, अदरक, टमाटर की खेती बड़े पैमाने पर होती है। सड़क बंद होने से ग्रामीणों की फसल घरों में खराब हो रही है।
जंगल के रास्ते आ रहे राशन लेने
आपदा प्रभावित गांवों के लोग जंगल के रास्ते पैदल चलकर मालदेवता राशन लेने आ रहे है। घंतू का सेरा निवासी विनोद ने बताया कि घर में राशन खत्म हो गया है। जंगल के रास्ते दो किमी पैदल चलकर मालदेवता आए हैं। उनसे आगे भी कई गांव हैं, जहां, खाने-पीने का संकट है।