क्या होता है डीप फेक
डीप फेक 'डीप लर्निंग' और 'फेक' का मिश्रण है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रयोग कर किसी मीडिया फाइल (चित्र, ऑडियो व वीडियो) की नकली कॉपी तैयार की जाती है, जो वास्तविक फाइल की तरह ही दिखती है और ठीक उसी तरह बातचीत करती है या उसी तरह की आवाज निकालती है, जैसी संबंधित व्यक्ति की असल में होती है। दूसरे शब्दों में कहें, तो डीप फेक अपने सबसे सामान्य रूप में ऐसे वीडियो होते हैं जहां एक व्यक्ति के चेहरे को कंप्यूटर जनित चेहरे से बदल दिया गया होता है। ये वीडियो डिजिटल सॉफ्टवेयर, मशीन लर्निंग और फेस स्वैपिंग का उपयोग करके बनाए गए कृत्रिम वीडियो होते हैं।
क्या करें, कैसे बरतें सावधानी
-वीडियो को गौर से और बार-बार देखें। असली और नकली का फर्क समझ में आ सकता है।
-एआई के माध्यम से तैयार आवाज का धारा प्रवाह सामान्य से थोड़ा अलग होता है।
-संबंधित वीडियो के बारे में इंटरनेट पर जरूर चेक कर लें। बहुत से फैक्ट चेक पोर्टल सच्चाई सामने ला सकते हैं।
-कोई बड़ा आदमी प्रमोशन कर रहा है तो यह जरूर सोचें कि उसे एक एप का प्रमोशन करने से क्या मिलेगा।
-फिल्म स्टार प्रमोशन कर सकते हैं लेकिन उद्योगपति अपने से अलग उत्पाद का प्रमोशन क्यों करेगा? यह भी सोचें।