नोटबंदी के बाद जिले में पहली बार सीआईयू टीम ने भारी मात्रा में नई करेंसी की खेप बरामद की है। पुराने नोटों को 30 प्रतिशत कमीशन लेकर बदलने की योजना से रुद्रपुर पहुंचे गदरपुर के दो युवकों के पास से टीम ने दस लाख की करेंसी बरामद कर उन्हें आयकर विभाग के सुपुर्द कर दिया है। करेंसी को कब्जे में लेकर आयकर विभाग मामले की जांच में जुटा है।
बैंकों में जहां एक ओर नई करेंसी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच रही है, वहीं दो युवकों से दस लाख की नई करेंसी बरामद करना सोमवार को शहर में चर्चा का विषय बना रहा। रविवार देर रात जिले में गठित सीआईयू(क्रिमिनल इंटेलीजेंस यूनिट) की टीम को सूचना मिली कि पांच मंदिर के पास स्थित होटल मानसरोवर के पास दो युवक पुराने नोटों को 30 प्रतिशत कमीशन लेकर बदलने की योजना बना रहे हैं।
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मौके पर पहुंची टीम ने जब दो युवकों को पकड़ा तो उनके पास से दस लाख की नई करेंसी बरामद हुई। पूछताछ में युवकों ने अपना नाम ग्राम श्यामनगर थाना गदरपुर निवासी अमित कुमार और पारस कुमार पुत्र बलवंत सिंह निवासी ग्राम विक्रमनगर थाना गदरपुर बताया।
पुलिस के सामने युवक नहीं दिखा पाये कागजात
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- फोटो : demo
अमित की जेब से टीम को दो हजार के 300 नोट और पारस के पास से 200 नोट बरामद हुए। पकड़े गए युवकों ने बताया कि उक्त रकम में से छह लाख उनके साथी गगन कुमार के हैं, जो बाजार में ही किसी से मिलने गया है, जबकि दो लाख उन्होंने अपने खाते से निकाले हैं। जब सीआईयू टीम ने पासबुक और बैंक के अन्य कागजात मांगने पर युवक नहीं दिखा पाए। इस पर टीम उन्हें कोतवाली ले आई।
बाद में दोनों को मय करेंसी आयकर विभाग के सुपुर्द कर दिया। फिलहाल आयकर विभाग करेंसी को कब्जे में लेकर मामले की जांच कर रहा है। करेंसी बरामद करने वाली टीम में एसआई जसवंत सिंह, हेड कांस्टेबल प्रकाश भगत, कांस्टेबल प्रवीण गोस्वामी, उमेश राज, फिरोज खान शामिल थे।
पुलिस विभाग की ओर से दस लाख की नई करेंसी बरामद कर आयकर विभाग को सौंपी गई है, जिसकी विभाग जांच कर रहा है। विभागीय जांच पूरी होने तक अधिकारी किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं कर सकते।
-लोकविंदर सिंह, असिस्टेंट डायरेक्टर, आयकर विभाग
मुखबिर की सूचना पर सीआईयू की टीम ने गदरपुर के दो युवकों से दस लाख की नई करेंसी बरामद की है। मामला जाली करेंसी का न होकर नई करेंसी का था, इसलिए युवकों को मय करेंसी के आयकर विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है। अब आयकर विभाग मामले में अग्रिम कार्रवाई करेगा।
-सेंथिल अबुदई, एसएसपी, ऊधमसिंह नगर
संदेह के घेरे में बैंकों की भूमिका
नोटबंदी के बाद से जहां उपभोक्ता घंटों बैंक की लाइन में लगने के बाद भी रुपए नहीं निकाल पर रहा है, वहीं लाखों की नई करेंसी को लेकर कुछ लोगों द्वारा कमीशन का कारोबार चलाना बैंकों की भूमिका को भी संदेह के घेरे में खड़ा करता है। उपभोक्ताओं के लिए बैंकों से निकाले जाने वाली रकम की लिमिट 24000 और एटीएम की लिमिट दो हजार रखी गई है। ऐसे में किसी भी बैंक से दस लाख की नई करेंसी निकाल पाना आसान नहीं है और वो भी इन हालातों में जब आरबीआई द्वारा बैंकों को उनकी डिमांड के अनुरूप करेंसी नहीं मिल पा रही हो।