उत्तर प्रदेश में सपा के विधायक मनोज पारस (नगीना) ने मंगलवार को यहां मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। सीजेएम ने विधायक की जमानत याचिका खारिज कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। मामले की अगली सुनवाई की 17 नवंबर नियत की गई है।
बता दें कि पौड़ी जिले के थाना लक्ष्मणझूला क्षेत्र में 2013 में बिजनौर के जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज हुआ था। आरोप था कि 17 जनवरी 2013 की रात को लक्ष्मणझूला के एक होटल में ठहरे जिला पंचायत सदस्यों के कमरों में जबरन घुसकर उनके साथ मारपीट व गालीगलौज की गई।
मामले में कोर्ट ने सपा विधायक मनोज पारस के खिलाफ वारंट जारी कर रखे थे। उत्तराखंड पुलिस मनोज पारस की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी। मंगलवार को मनोज पारस ने सीजेएम पौड़ी की अदालत में सरेंडर करते हुए जमानत याचिका प्रस्तुत की।
बाकी साथियों ने भी किया था सरेंडर
नामित अधिवक्ता जय दर्शन बिष्ट ने बताया कि विधायक के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर मनोज पारस को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है।
इसी मामले में इससे सपा सरकार में मंत्री रहे मूलचंद चौहान, उनके बेटे अमित चौहान, कपिल, रजा अली परवेज, पूर्व जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन, शेरबाज पठान, पूर्व सपा सांसद नगीना यशवीर धोबी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष नसरीन सैफी के पति रफी सैपी आदि सपा नेताओं को भी कोर्ट में सरेंडर करना पड़ा था। इन सभी को भी कोर्ट ने जेल भेज दिया था। बाद में ये सब जमानत पर छूटकर जेल से बाहर आए थे।