युवती से बलात्कार के मामले में देहरादून पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया था लेकिन जब इसमें उस समय की सत्ताधारी पार्टी के बड़े नेताओं का नाम सामने आने लगे तो उसके पसीने छूट गए।
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स्थिति यह है कि मामले में अज्ञात के नाम से दर्ज तीन लोग आज तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ पाए हैं। बताया जाता है कि इसमें भाजपा के दो बड़े नेता और एक आईएएस अधिकारी शामिल है। वर्ष 2008 में हुए सामूहिक बलात्कार के मामले में बुधवार को अदालत ने दो आरोपियों को दोषी मान लिया है। कोर्ट बृहस्पतिवार को सजा सुनाएगी।
लेकिन मामले में तीन आरोपी आज तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ पाए हैं। बताया जाता है कि इसमें से एक आरोपी हरिद्वार से भाजपा का बड़ा नेता है। एक अन्य आरोपी उस समय पार्टी में बड़े पद पर पदासीन था। एक आईएएस अधिकारी है, जो इस समय एक बड़े पद पर विराजमान है।
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बताते हैं कि मामले में पुलिस को नहीं पता था कि प्रकरण तब के सत्ता पक्ष के कई कद्दावर नेताओं से जुड़ा है। अशोक के फोन की कॉल डिटेल खंगालने के बाद जैसे-जैसे मामले से पर्दा उठता गया, पुलिस के हाथ-पांव फूलते गए। उस समय प्रमोद कुमार भाजपा में ऊंची पहुंच रखता था। सूत्रों की मानें तो उसे जल्द ही राज्यमंत्री का दर्जा मिलने वाला था।
दो बड़े नेताओं और एक आईएएस अधिकारी
सूत्र बताते हैं कि पुलिस को जब दो भाजपा के बड़े नेताओं और एक आईएएस अधिकारी के नामों की जानकारी हुई तो उसने अपने कदम ही पीछे खींच लिए। बताया जाता है कि इसके लिए उस पर सत्तापक्ष का काफी दबाव था। पुलिस ने उस समय चुप्पी साधी तो आज तक तीनों पर हाथ नहीं डाल पाई।
बताते हैं कि उस समय पुलिस ने तीनों आरोपियों के स्केच बनवाए थे। उस स्केच से जब तीनों के चेहरे मिले तो पुलिस के चेहरे पर पसीने आ गए। सूत्रों की मानें तो युवती ने कहा था कि यदि तीनों की शिनाख्त परेड कराई जाए तो वह उन्हें पहचान सकती है। लेकिन पुलिस ने आज तक ऐसा नहीं किया।
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