देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के श्यामपुर निवासी राजेंद्र जोशी और उनकी मां कमला जोशी का शव मिलने के बाद अब पुलिस की निगाहें फरार ड्राइवर पर हैं।
जिस तरह से मासूम और उसके पिता से लेकर दादी की हत्या कर शव फेंके गए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि राजेंद्र जोशी जिस कार से जा रहे थे, उनका ड्राइवर सुपारी किलर हो सकता है। पुलिस की जांच अब तेजी से इस ओर बढ़ रही है। हत्या में एक नहीं करीब दो से तीन लोग शामिल माने जा रहे हैं।
तीनों हत्याएं किसी पिस्टल, रिवाल्वर या तमंचे से नहीं की गई हैं, बल्कि धारदार हथियारों का उपयोग किया गया है। हालांकि राजेंद्र जोशी और कमला जोशी के शव सड़-गल चुके हैं, लेकिन शवों पर जगह-जगह घाव के निशान बताते हैं कि तीनों को धारदार हथियारों से मारा गया है।
उधर, पुलिस के एक अधिकारी का कहना है कि आजकल टैक्सी स्टैंड पर कुछ अपराधी प्रवृत्ति के लोग भी शामिल हो गए हैं, जो ड्राइवर के रूप में सुपारी किलर होते हैं। ऐसे लोगों का काम सिर्फ आपराधिक घटनाओं को अंजाम देना होता है। ये लोग एक ग्रुप बनाकर कई जगहों पर रहते हैं।
इन लोगों का कई प्रदेशों में नेटवर्क फैला रहता है। वहीं, पुलिस की शंका इस ओर भी है कि हत्यारों आखिर सितारगंज को ही क्यों चुना। देहरादून से लेकर काशीपुर तक कई सुनसान इलाके थे, जहां वारदात को अंजाम देने के बाद शवों को ठिकाने लगाया जा सकता था। लेकिन सितारगंज और सिडकुल क्षेत्र को ही हत्यारों ने क्यों चुना, यह भी पुलिस की जांच का अहम पहलू है।
माना जा रहा है कि हत्यारे सितारगंज से भलीभांति परिचित हों, इसलिए संदेह जताया जा रहा है कि हत्यारों का सितारगंज से भी कोई न कोई लिंक है।
पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। राजेंद्र जोशी और उनकी मां कमला जोशी के शव मिलने के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि इस मामले में ड्राइवर का भी कहीं न कहीं हाथ हो सकता है। पुलिस इस दिशा में तेजी से जांच में जुटी है। उम्मीद है जल्द ही जोशी परिवार हत्याकांड का खुलासा कर दिया जाएगा।
- केवल खुराना, एसएसपी, यूएस नगर