कंबल कारोबारी अमित दीक्षित उर्फ गोल्डी हत्याकांड को अंजाम देने वाले तीन शूटर पास के ही एक विवाह मंडप में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए हैं। शूटरों ने घटनास्थल से फलांग भर की दूरी पर एक दुकान पर सिगरेट भी पी थी और सिर में गोली मारने के बाद भी जब कारोबारी की मौत नहीं हुई तो अंधाधुंध गोलियां बरसाई थी। ये पूरा सीन कुछ लोगों ने अपने घरों की खिड़की से देखा है पर सभी ने मुंह सिल लिए हैं।
सोमवार की शाम प्रोफेशनल रहे शूटरों ने बेहद ही दुस्साहसिक ढंग से वारदात को अंजाम दिया। दबी जुबां में कुछ प्रत्यशदर्क्षियों ने अपने करीबीयों से पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार बयां किया। बताया कि, शूटरों ने पहले स्कूटी पर जा रहे गोल्डी को रोका। बाइक पर पीछे बैठे एक युवक ने उसके सिर पर गोली मारी। गोली लगने पर नीचे गिरे गोल्डी ने जब खंभा पकड़कर उठने का प्रयास किया तो फिर दूसरे युवक ने बाइक से उतरकर अंधाधुंध गोलियां बरसाई।
तब मुख्य सड़क पर कुछ बच्चे भी खेल रहे थे जो भाग खड़े हुए। पुलिस ने एक विवाह मंडप के मुख्यद्वार पर लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगाला तब एक बाइक पर सवार होकर भागते हुए शूटर कैद हुए। दो शूटर हेलमेट पहने हुए थे और एक ने नहीं पहना था। वे मेला अस्पताल की तरफ से भागे थे। ये भी पता चला कि, शूटरों ने निर्मला छावनी की ही एक दुकान पर खड़े होकर सिगरेट भी पी थी।
एक दशक बाद फिर शांत फिजां में तारी हुआ खौफ
फायरिंग
एक दशक बाद फिर हरिद्वार की शांत फिजां में खौफ तैरने लग गया है। हाई प्रोफाइल अमित दीक्षित हत्याकांड ने शहर को हिलाकर रख दिया है। आमजन के चेहरों पर दहशत साफ दिखाई दे रही है।
श्रवणनाथ नगर में ट्रेवल्स व्यवसायी हरवीर सिंह की 13 जुलाई 2007 को घर के बाहर ही गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। 24 अप्रैल 2008 में ट्रेवल्स व्यवसायी कृष्ण मुरारी पर मायादेवी मैदान में ट्रेवल्स के कार्यालय पर ही गोलियां बरसाई गई। उनकी जान बच गई लेकिन अब ट्रेवल्स व्यवसायी अपने पैरों पर खड़े होने से मोहताज है।
इन वारदात का लिंक कुख्यात संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा से जुड़ा था। इन दो वारदातों ने हरिद्वार को झकझोर दिया था। तब से अब तक इस तरह की दुस्साहसिक अंदाज में किसी वारदात को अंजाम नहीं दिया था, लेकिन गोल्डी हत्याकांड ने फिर से याद ताजा कर दी है। नब्बे के दशक में भी होटल मालिक राजन रंधावा, घनश्याम भगत, सनत शर्मा, नानक चंद शर्मा, नरेश ठाकुर उर्फ दारोगा, भारतेंदु हांडा की हत्याएं भी बेहद ही दुस्साहस से की गई थी।