हर्रावाला में सीआईएसएफ के सहायक कमांडेंट के घर हुई डकैती के मुख्य आरोपी सागर उर्फ जहांगीर चौधरी को पुलिस ने 23 जून की रात गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार उसने ही साथियों के साथ डालनवाला में कपड़ा कारोबारी के यहां भी डकैती डाली थी। सागर की निशानदेही पर सहायक कमांडेंट के घर की डकैती का माल बरामद हुआ है। डकैती के सात आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि 13 जून को सहायक कमांडेंट राहुल ढौडियाल के हर्रावाला स्थित आवास में डकैती हुई थी। इस मामले में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सरिता डोभाल के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी। टीम ने 17 जून को चांडी प्लांटेशन लालतप्पड़ से डकैती में शामिल सात बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया था।
डकैती का मास्टर माइंड सागर उर्फ जहांगीर चौधरी निवासी मोरलगंज बागरहाट बांग्लादेश फरार चल रहा था। सागर करीब 15 साल से इस्माइलपुर ख्वाजा सराय फरीदाबाद हरियाणा में रह रहा था। 23 जून की रात सागर को भानियावाला तिराहा से गिरफ्तार कर लिया गया।
सागर के पास मिले बैग से हर्रावाला की डकैती के दो चांदी के सिक्के, एक सोने का लॉकेट समेत धारदार हथियार, चापड़ और चाकू बरामद हुआ है। गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में मनोज रावत, सुरेश चंद्र बलूनी, भवन चंद्र पुजारी, राज कुमार और एसओजी के पीडी भट्ट एवं प्रमोद कुमार मौजूद थे।
सागर का आपराधिक इतिहास
सागर का आपराधिक इतिहास
- 2002 में थाना बसंत विहार दिल्ली में धारा 307 का मुकदमा, तिहाड़ जेल दिल्ली, न्यायिक अभिरक्षा में रहा।
- 2008 में कविनगर गाजियाबाद में धारा 457 और 380 का मुकदमा, डासना जेल गाजियाबाद, न्यायिक अभिरक्षा में रहा।
- 2015 में थाना खिरकीदौला गुड़गांव हरियाणा में धारा 457 और 380 के तहत मुकदमा, भौंसी गुड़गांव जेल, न्यायिक अभिरक्षा में रहा।
रेकी के बाद देता था घटनाओं को अंजाम
सागर उर्फ जहांगीर चौधरी डकैती की घटनाओं को अंजाम देने से पहले रेकी करता था। इसके बाद नजरूल और बड़ा दुलाल की मदद से बांग्लादेशियों की गैंग बनाता था। नजरूल और बड़ा दुलाल शातिर बदमाश हैं और सागर के साथ डकैतियों और दूसरे आपराधिक वारदातों में शामिल रहे चुके हैं। गैंग बनाने के बाद मौका पाकर वारदात को अंजाम देता था।
राशन व आधार कार्ड भी बने
डकैती के आरोपी में गिरफ्तार सागर और दूसरे बदमाश करीब डेढ़ दशक से एनसीआर क्षेत्र में रहते हैं। बांग्लादेशियों के राशन कार्ड से लेकर आधार कार्ड बने हैं। भारतीय नागरिकों की तरह बेरोकटोक घूमते हैं। गैंग बनाकर वारदात करते हैं और फिर अलग हो जाते हैं।