नाबालिग का अपहरण कर बलात्कार के दोषी दो युवकों को अदालत ने सात साल की कठोर कैद की सजा सुनाई। दोनों को 70 हजार रुपये बतौर अर्थदंड भी देने होंगे। इसे न देने पर छह महीने का अतिरिक्त कारावास भी काटना होगा।
2011 का है मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार कोतवाली थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति की नाबालिग बेटी चार अप्रैल वर्ष 2011 को घर से सुबह दुकान में सामान लेने के लिए निकली थी, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटी।
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लड़की को हबीब उर्फ सागर, निवासी 64 एमडीडीए कालोनी लक्ष्मण चौक देहरादून और जमशेद उर्फ सिद्धू निवासी माजरा मस्जिद वाली गली, थाना पटेलनगर डरा धमकाकर अपने साथ देवबंद सहारनपुर ले गए। वहां सागर ने लड़की के साथ बलात्कार किया।
सात गवाह हुए पेश
पुलिस ने बाद में दोनों आरोपियों को आईएसबीटी के पास से गिरफ्तार कर लिया था। अभियोजन की ओर से मामले में सात गवाह पेश किए गए।
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अभियोजन वकील के तौर पर हरेंद्र सिंह पुनिया ने दोषियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की। उनका तर्क था कि दोनों की करतूत से लड़की के भविष्य पर असर हुआ है।
कम सजा की गुहार लगाई
बचाव पक्ष की ओर से सागर के अधिवक्ता ने कहा कि सागर मेहनत-मजदूरी करने वाला विकलांग है। उसका पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, उसे कम से कम सजा सुनाई जाए।
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वहीं जमशेद के बारे में तर्क दिया गया कि वह इकलौता पुत्र है और उसके पिता बीमार हैं।
मेरे बेटे को झूठा फंसाया
जमशेद की मां रुखसाना ने कहा कि पुलिस ने उसके बेटे को झूठे मामले में फंसाया है। वहीं सागर की मां इमराना ने कहा कि लड़की नाबालिग नहीं है, यदि वह नाबालिग है तो उसकी शादी कैसे हुई। उसने कहा कि सागर उसका सबसे बड़ा बेटा है जो मजदूरी करके घर चलाता है।