अगले दिन सुबह उसने उठकर देखा तो बच्ची मृत पड़ी थी। उसने बच्ची की हत्या की आशंका जताते हुए अपने पिता को बुलाया। इस बीच आस-पास के लोगों ने इसे स्वाभाविक मौत मानते हुए बच्ची के शव को दफना दिया।
महिला ने राजस्व पुलिस में बच्ची की बलात्कार के हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई। स्थानीय लोगों के दबाव में बच्ची के शव को गड्ढे से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया। इस बीच आरोपी यूसुफ को भी राजस्व पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
विवेचना अधिकारी ने आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक चंद्रवीर सिंह नेगी ने मामले में 13 गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत ने इसे जघन्यतम अपराध मानते हुए अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई।