जिला एवं सत्र न्यायाधीश पौड़ी की अदालत ने नाबालिग से दुराचार के दोषी को 20 साल की कैद व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। लेकिन इससे पहले आरोपी ने पीड़िता के साथ जो किया उस पर आपको यकीन नहीं होगा।
इसी मामले में षड्यंत्र का दोषी पाए जाने पर तीन अन्य को तीन-तीन साल की सजा भी सुनाई गई है। एक अन्य आरोपी के नाबालिग होने पर उसका केस किशोर न्यायालय के अधीन चल रहा है। इस मामले में पीड़िता के चाचा ने नौ अगस्त 2015 को पट्टी पटवारी के पास रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
जिला शासकीय अधिवक्ता अवनीश नेगी ने बताया है कि कोटद्वार तहसील क्षेत्र के एक गांव में कक्षा 11वीं में पढ़ रही छात्रा के साथ उसी के साथ पढ़ रहे एक नाबालिग और इसी गांव के रहने वाले एक युवक ने दुराचार किया था। आरोपियों ने पीड़ित के माता पिता को मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी।
पीड़िता को बुआ के पास छोड़ा
गर्भवती महिला
मामले का पता तब चला जब पीड़िता गर्भवती हो गई। मामले का मुख्य आरोपी, नाबालिगके माता-पिता और एक आशा कार्यकर्ता पीड़िता को 26 जुलाई 2015 को कोटद्वार स्थित एक चिकित्सालय में उपचार के लिए लाए।
नाबालिग की तबीयत अधिक खराब होने पर उसे इसी दिन शाम को नजीबाबाद के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहां पीड़िता की डिलीवरी हुई।
जब पीड़िता को भर्ती करवाया गया तो आरोपियों में से एक ने स्वयं को उसका पति बताया था। इस पर डाक्टरों ने पीड़िता को भर्ती कर उसका उपचार किया। इसके बाद अस्पताल से पीड़िता को बुआ के पास हरिद्वार में छोड़ दिया गया। पीड़िता का लालन-पालन कर रहे चाचा को जब सारी बात पता चली तो उन्होंने राजस्व क्षेत्र में नौ अगस्त 2015 को मुकदमा दर्ज करवाया।
पीड़िता को एक लाख का विशेष मुआवजा देने के आदेश
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तब राजस्व पुलिस ने दुराचार और पोस्को अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। बाद में यह मामला रेगुलर पुलिस के पास आया। पुलिस ने मेडिकल करवाने के बाद पीड़िता के बयान लिए।
इसमें पीड़िता ने बताया कि उसके साथ पढ़ने वाले छात्र और गांव के ही युवकों ने उसके साथ दुराचार किया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश पौड़ी की अदालत ने नाबालिग से दुराचार के दोषी जय प्रकाश को 20 साल की सजा सुनाने सहित 50 हजार का जुर्माना भी लगाया।
अदालत ने इस मामले में षड्यंत्र का दोषी पाते हुए नाबालिग के पिता घनानंद, मां संगीता और कोटद्वार निवासी आशा कार्यकर्ता सुमित्रा को तीन-तीन साल की सजा सुनाई। अदालत ने जिला शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से प्रदेश सरकार को भी निर्देश दिए हैं कि वह पीड़िता को एक लाख का विशेष मुआवजा दे।