अधिवक्ता राजेश सूरी हत्याकांड में एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने डीआईजी गढ़वाल को अग्रिम जांच के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर सीजेएम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की है।
बता दें कि अधिवक्ता राजेश सूरी ने प्रदेश के कई घोटालों को उजागर किया था। इन्हीं में से कई मामलों में वे सुनवाई के लिए हाईकोर्ट नैनीताल आते-जाते रहते थे। 29 नवंबर 2014 को हाईकोर्ट से लौटते वक्त ट्रेन में उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। अगले दिन उन्होंने शहर के निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया था। पोस्टमार्टम कराया गया तो चिकित्सकों ने मौत का कारण हृदयघात बताया था और विसरा संरक्षित कर लिया था। पांच दिसंबर को राजेश की बहन रीता सूरी की शिकायत पर कोतवाली में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।
कुछ समय बाद विसरा जांच रिपोर्ट में पता चला कि राजेश सूरी की मृत्यु जहर के सेवन से हुई थी। ऐसे में मुकदमे में आईपीसी धारा 328 बढ़ा दी गई। हालांकि, रीता सूरी पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं थीं। उनकी मांग पर जांच के लिए तत्कालीन एसपी सिटी अजय सिंह के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी ने करीब 11 महीनों तक प्रकरण की जांच की और अंतिम रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करते हुए राजेश सूरी की मौत को संदिग्ध बताया था। इसी फाइनल रिपोर्ट को रीता सूरी ने पिछले दिनों हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने मामले में सीजेएम कोर्ट देहरादून को एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट पर सुनवाई कर चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे। इन आदेशों के बाद सीजेएम कोर्ट ने गत 16 अगस्त को रीता सूरी की आपत्ति पर सुनवाई की। इसके बाद बृहस्पतिवार को आदेश पारित किए गए। सीजेएम कोर्ट ने एसआईटी की रिपोर्ट को खारिज करते हुए डीआईजी गढ़वाल को जांच के आदेश दिए हैं।
अदालत का फैसला मेरे लिए रक्षाबंधन पर भाई के उपहार जैसा है। मैं चार सालों से अपने भाई को न्याय दिलाने के लिए लड़ रही हूं। मुझे उम्मीद है कि अदालत मुझे न्याय दिलाने में मदद करेगी।
- रीता सूरी, राजेश सूरी की बहन