गनर वापस लिए जाने के मामले में अब राज्य सूचना आयोग और शासन आमने सामने आ गए हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत ही यह मामला सूचना आयोग में चल रहा है और अब आयोग ने गृह विभाग को इस मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा है।
गृह विभाग ने इस संबंध में मांगी गई सूचना पर अपील की सुनवाई करने से यह कहकर इनकार कर दिया था कि किसी भी मामले में दोबारा अपील नहीं सुनी जा सकती। इस मामले में एक बार अन्य विभाग की ओर से अपील की सुनवाई हो चुकी है।
कुछ समय पहले ही शासन ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए सूचना आयुक्तों से गनर वापस ले लिए थे। दून निवासी भूपेंद्र कुमार ने सूचना के अधिकार अधिनियम का उपयोग करते हुए शासन से यह पूछा था कि किस आधार पर गनर वापस लिए गए।
शासन से स्पष्ट सूचना न मिलने पर यह मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचा। इस मामले की सुनवाई के दौरान गृह विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में सामान्य प्रशासन की ओर से अपील निस्तारित की जा चुकी है। राज्य सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल ने गृह विभाग के इस तर्क को खारिज किया।
सुनवाई का निर्देश
उन्होंने कहा कि सामान्य प्रशासन की ओर से गृह विभाग को अपील की सुनवाई का निर्देश दिया गया था। गृह विभाग इस आधार पर अपील की सुनवाई से इनकार नहीं कर सकता। बताया गया कि राज्य सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा के शस्त्र लाइसेंस के लिए जिलाधिकारी देहरादून की ओर से गृह विभाग को पत्र भेजा जा चुका है।