हरिद्वार जिले में रहस्यमय परिस्थितियों में विषैला पदार्थ खा लेने से हुई तीन बहनों की मौत की गुत्थी अभी तक सुलझ नहीं सकी है। जबकि इस मामले में तीनों बहनों की मां अस्पताल में जीवन और मौत से जूझ रही है।
अगर इस मामले में पुलिस की जांच भी इसी तरह से चलती रही तो तीन बेटियों की मौत का राज भी ठीक वैसे ही दफन हो जाएगा जैसा डाडा पट्टी गांव में दंपत्ति हत्याकांड का राज दफन हो गया है। आज दो साल बीतने के बावजूद दंपत्ति हत्याकांड का खुलासा नहीं हो सका है।
बेहोशी की हालत में मिली
दो अक्तूबर को सिकंदरपुर भैंसवाला गांव के सुरेशपाल की पत्नी सुरेला अपनी तीन बेटियों के साथ लकड़ी बीनने जंगल गई थी। बाद में चारों एक नलकूप के पास बेहोशी की हालत में मिली थीं।
दो बेटियों ने उसी दिन जबकि तीसरी बेटी ने एक दिन बाद दम तोड़ दिया था। छह दिन बीत जाने के बावजूद इस मामले में पुलिस के हाथ खाली हैं।
पुलिस की जांच जिस तरह से चल रही है ऐसे में घटना से पर्दा उठना मुश्किल लग रहा है। जबकि ग्रामीण चाहते हैं कि इन तीनों मौतों का राज खुलना चाहिए। पुलिस एक ही रट लगाए हुए है कि सुरेला के होश में आने के बाद ही कुछ पता चल पाएगा। हालांकि अब सुरेला होश में आ चुकी है लेकिन पुलिस का कहना है कि अभी उसे ज्यादा परेशान करना ठीक नहीं है।
इस हत्याकांड का खुलासा भी नहीं हुआ
मामले का खुलासा नहीं होने से एक बार फिर थाना क्षेत्र के डाडा पट्टी गांव में हुए दोहरे हत्याकांड की याद ताजा होने लगी है।
13 मई 2011 की रात को अज्ञात बदमाशों ने बुजुर्ग दंपति साधुराम और उसकी पत्नी शिमला की घर में ही गला दबाकर हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड का खुलासा अभी तक नहीं हो सका। अब इस हत्याकांड की जांच सीबीसीआईडी कर रही है।
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