त्तराखंड पुलिस ने मेरठ के छह ऐसे बदमाशों को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। जो लंबे समय से वांछित चल रहे थे और इनमें से एक मैराथन में ईनाम भी जीत चुका है।
सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस और एसओजी की टीम ने अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए कबाड़ी समेत छह बदमाशों को गिरफ्तार कर इनकी निशानदेही पर तीन स्कूटी बरामद की है। पूछताछ में इन्होंने खुलासा किया कि वह 50 से अधिक वाहनों को काटकर ठिकाने लगा चुके हैं। रुड़की, हरिद्वार और मेरठ समेत कई अन्य स्थानों पर भी गिरोह के अन्य बदमाश पूरी तरह सक्रिय हैं।
एसपी देहात मणिकांत मिश्रा ने प्रेसवार्ता कर बताया कि वाहन चोरी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस और एसओजी की एक टीम जांच के लिए गठित की थी। सोमवार को मुखबिर ने सूचना दी कि नहर किनारे एक वाहन चोर गिरोह मौजूद है।
मौके पर पहुंची टीम ने सुधीर शर्मा उर्फ सन्नी (निवासी चक्कीवाली गली, सरधना रोड़, दौराला, जिला मेरठ), अमित भड़ाना (निवासी काजीपुर थाना खरखौदा जिला मेरठ), नीरज जाटव (मकान नंबर 850 मुंडालीवाला मोहल्ला टीपीनगर मेरठ), दिनेश जाटव (निवासी कुएवाला मोहल्ला मसूरी थाना इंचौली मेरठ) और हिमांशु जाटव (निवासी मकान नंबर 32 बेरीपुरा थाना टीपी नगर दिल्ली रोड मेरठ) को गिरफ्तार किया।
मैराथन के लिए सम्मानित हुआ था आरोपी
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पुलिस ने आरोपियों को कोतवाली लाकर पूछताछ की तो आरोपियों ने खुलासा किया कि वह गंगनहर, सिविल लाइंस और रानीपुर पुलिस थाना क्षेत्रों से अब तक करीब 50 बाइक चुरा चुके हैं। आरोपियों ने खुलासा किया है कि वह क्षेत्र से बाइक चोरी कर मेरठ के एक कबाड़ी अहमद निवासी सोतीगंज थाना सदर बाजार मेरठ को पांच हजार रुपये में बेच देते थे।
उसके बाद कबाड़ी बाइकों को काटकर उसके पुर्जे-पुर्जे बेच देता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मेरठ से चुराई तीन स्कूटी बरामद की हैं। एसपी देहात ने बताया कि कबाड़ी सहित सभी छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया है।
एसपी देहात ने खुलासा किया कि गिरोह का सरगना सुधीर शर्मा दो साल पहले हरिद्वार में हुई हाफ मैराथन में हिस्सा में शामिल हुआ था। इसमें सुधीर ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। जिसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उन्हें इनाम देकर सम्मानित किया था।
बीटेक कर चुका है एक आरोपी
गिरोह का एक सदस्य नीरज जाटव चार साल पहले बीटेक कर चुका है। उसके बाद नीरज नौकरी के लिए भटकता रहा, लेकिन उसे नौकरी नहीं मिली। उसके बाद वह गिरोह के संपर्क में आया।