एसपी देहात अजय सिंह ने बताया कि 17 जनवरी को बदमाशों ने यूपी मुजफ्फरनगर में तैनात आरईएस के जेई केपी सिंह और उनके किराएदार के घर में डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। इसके बाद एक लाख रुपये की नकदी और लाखों के जेवरात लेकर फरार हो गए थे।
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मुखबिर की सूचना पर शुक्रवार को पुलिस और एसओजी टीम ने बाइक सवार चार आरोपियों को तेलीवाला फाटक के समीप गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपियों के कब्जे से 10 हजार रुपये, चार सोने के कंगन, सोने की चेन और अंगूठी के अलावा एक चाइनीज पिस्टल, देशी तमंचा और चाकू बरामद किया गया।
दून में प्रापर्टी डीलर की हत्या में संलिप्तता का दावा
एसपी देहात की मानें तो देहरादून राजपुर थाना क्षेत्र में प्रापर्टी डीलर
की हत्या और क्लेमेंटटाउन क्षेत्र से एक कार लूट की वारदात में भी पकड़े गए
आरोपियों का हाथ था। यही नहीं दिल्ली स्थित गाजीपुर से स्विफ्ट कार लूट की
वारदात में भी आरोपियों की संलिप्तता रही है।
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पूछताछ में बदमाशों ने अपने नाम मनोज उर्फ प्रधान निवासी गोयला थाना
शाहपुर, प्रवीण उर्फ डब्बू निवासी कृष्णापुरी मुजफ्फरनगर, अमित निवासी
भैंसवाल थाना गढ़ी पुख्ता जिला शामली यूपी तथा रणकुमार निवासी बड़ौत जिला
बागपत बताए।
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एसपी देहात का कहना है कि इस गिरोह में शामिल रहे दो बदमाश दीपक पंवार
निवासी एलम थाना कांधला शामली तथा सचिन निवासी बड़ौत जिला बागपत अभी फरार
हैं।
डकैती और लूट में उलझी पुलिस
लक्ष्मीनगर में हुई वारदात के खुलासे की मिस्ट्री में पुलिस खुद ही उलझ गई है। वारदात के समय छह बदमाशों ने बंधक बनाकर वारदात को अंजाम दिया था, लेकिन पुलिस ने चार बदमाशों के शामिल होने की बात कहकर लूट का मामला दर्ज किया था।
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अब जबकि चार बदमाश गिरफ्तार किए गए हैं और दो बदमाशों के फरार होने की बात सामने आई है तो पुलिस की पोल खुल गई है। भले ही पुलिस ने लूट की वारदात कहकर मामले का खुलासा किया, लेकिन छह बदमाशों के शामिल होने से साफ है कि मामला लूट का नहीं बल्कि डकैती का था।
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इस सवाल पर पुलिस अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं। तर्क यह दिया जा रहा है कि दो बदमाश घर के बाहर खड़े थे। मालूम हो कि वारदात में पांच या पांच से अधिक बदमाशों के शामिल होने पर लूट की वारदात डकैती में तब्दील हो जाती है।
न हुई मुठभेड़ और न चली गोलियां
जिन बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है उनके खिलाफ कई थानों में मुकदमे दर्ज हैं। बदमाशों के पास से पुलिस ने चाइनीज पिस्टल और देशी तमंचे भी बरामद किए हैं।
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इसके बावजूद गिरफ्तारी से पहले न तो कोई मुठभेड़ हुई और न ही कोई गोली चलाई गई।
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ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि इतनी आसानी से बदमाश पुलिस के हाथ कैसे आ गए, जबकि पुलिस इनके कुख्यात होने का दावा कर रही है।
बदमाशों का है अपराधिक इतिहास
मनोज उर्फ प्रधान- शाहपुर, गाजीपुर, क्लमेंटटाउन देहरादून, छपार मुजफ्फरनगर तथा कोतवाली गंगनहर में छह से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
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प्रवीण उफ डब्बू- इसके खिलाफ थाना मंडी मुजफ्फरनगर, क्लेमेंटटाउन देहरादून तथा छपार मुजफ्फरनगर में लूट समेत पांच मुकदमे दर्ज हैं।
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अमित- इसके खिलाफ गढीपुख्ता शामली, कोतवाली गंगनहर, बड़ौत, क्लेमेेंटटाउन देहरादून में लूट एवं हत्या के प्रयास के चार मुकदमे हैं।
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रणकुमार- इसके खिलाफ बड़ौत जिला बागपत में लूट का मुकदमा दर्ज है।