पंजाब नेशनल बैंक देवप्रयाग शाखा से वर्ष 2009 में ग्रामीणों के नाम से फर्जी लोन मंजूर करवाकर 91 लाख रुपये गबन करने के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने तत्कालीन बैंक मैनेजर की मिलीभगत से फर्जी फर्म बनाकर अपनी पत्नी सहित 11 लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से लोन लिया था। मामले का दूसरा आरोपी तत्कालीन बैंक मैनेजर गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट से स्थगनादेश ले आया है।
नवंबर 2016 में जिमाण गांव (पालकोट पट्टी) निवासी रामानंद सती, सत्यपाल सिंह, धर्म सिंह, सोना दास व वासुदेव आदि ने देवप्रयाग थाने में स्थानीय निवासी भगवती प्रसाद के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराया था। ग्रामीणों की शिकायत थी कि भगवती प्रसाद ने वर्ष 2009 में फर्जीवाड़ा कर उनके नाम पर बैंक से 91 लाख रुपये का लोन ले लिया। फर्जीवाड़े की जानकारी ग्रामीणों को वर्ष 2012 में तब हुई, जब लोन चुकता न होने पर बैंक ने उनके घरों में वसूली के लिए पत्र भेजे। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने विवेचना शुरू की, तो बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक केबी कुलश्रेष्ठ का नाम भी चार्जशीट में जुड़ गया।
भगवती प्रसाद ने प्रबंधक की मिलीभगत से फर्जी फर्मों के खाते खुलवाकर जाली बिलों के जरिए लोन की धनराशि हड़प ली। शुक्रवार सुबह विवेचना अधिकारी थाना प्रभारी विनोद राणा ने पुलिस बल के साथ जिमाण गांव में दबिश देेते हुए आरोपी भगवती प्रसाद को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। राणा ने बताया कि विवेचना जारी है। चार्जशीट में अन्य के नाम भी जुड़ सकते हैं।