नाभा जेल पर हमला कर खालिस्तानी आतंकी को छुड़ाने के पीछे गैंग का इरादा बड़ा टेररिस्ट ग्रुप तैयार करने का था। इसके लिए मास्टर माइंड ने 10 दिन बाद की तारीख तय की थी, जिसमें व्हाट्सएप के जरिए सभी से संपर्क करना था। पर ऐन वक्त पर पलमिंदर की गिरफ्तारी से मास्टरमाइंड का पूरा खेल खराब हो गया।
विज्ञापन
साथ ही यह पोल भी खुल गई कि फरारी के बाद आतंकी मिंटू के अलावा गैंग के दूसरे सदस्यों को कहां-कहां उतारा गया। इसी आधार पर घेराबंदी कर आतंकी और दूसरे सदस्यों को दबोच लिया गया।
खालिस्तानी आतंकी हरमिंदर सिंह उर्फ मिंटू समेत छह कैदियों के फरार होने की घटना के बाद देश भर में अलर्ट जारी करते हुए खुफिया से इनपुट आया था कि आतंकी और उसके साथी चार कारों में सवार होकर भागे हैं।
विज्ञापन
मामले की गंभीरता देखते हुए पुलिस फौरन अलर्ट मोड में आ गई। कुछ ही देर बाद इसका परिणाम भी पुलिस को पलमिंदर उर्फ पिंदा की गिरफ्तारी के साथ मिल गया।
पिंदा की गिरफ्तारी के बाद खुल गया सारा खुफिया प्लान
पलविंदर की मदद करने की आरोपी गीता और आदिल
- फोटो : AmarUjala
पिंदा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसी को उससे सच उगलवाते देर नहीं लगी। कैथल, कुरुक्षेत्र के अलावा पानीपत में छोड़कर पलविंदर कैराना की तरफ आया था। हरमिंदर को हाइवे पर उतारा गया था। बिना देर किए खुफिया एजेंसियों और पुलिस ने घेराबंदी कर आतंकी और साजिश के कई किरदारों को एक-एक करके दबोच लिया।
सूत्रों की माने तो यह पहले तय हो गया था कि सभी को अलग-अलग रहना है और दस दिन बाद ही एक दूसरे से संपर्क करना है वो भी फोन पर नहीं बल्कि व्हाट्स ऐप पर। ताकि खुफिया को उनके बारे में कोई क्लू न मिल सके।
अपराधी और आतंकी गठजोड़ का पूरा सच तो पूरी जांच पड़ताल के बाद ही सामने आएगा। पर यह साफ हो गया कि जेल ब्रेक के पीछे गैंग का इरादा कुछ बड़ा करने का था।
नेपाल जाने की तैयारी में था पिंदा
नाभा जेल पटियाला
पुलिस बड़ा टेररिस्ट ग्रुप तैयार करने की आशंका से भी इनकार नहीं कर रही है। इसके अलावा एक बात और पता चली है कि पिंदा और सुनील नेपाल जाने की तैयारी में थे। पलविंदर के कुमाऊं क्षेत्र में भी कुछ लोगों से गहरे रिश्ते बताए गए हैं। पुलिस इस इनपुट पर भी काम कर रही है।
जूतों में मिले मोबाइल
पुलिस को मकान की तलाशी के दौरान जूतों में रखे दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। इन मोबाइल फोन के सहारे पुलिस मोबाइल विक्रेता तक पहुंच गई है। एसपी सिटी अजय सिंह ने बताया कि दोनों मोबाइल आठ दिन पहले ही खरीदे गए थे। जबकि पांच माह में छह और सात मोबाइल एक ही दुकानदार के यहां से खरीदे गए हैं।
पुलिस ने फरार सुनील और उसकी पत्नी गीता के बैंक खातों को खंगाला है। लगातार खातों में नगद राशि आने की पुष्टि हुई। नवंबर माह में 95 हजार और 38 हजार रुपये गीता के खाते में जमा किए गए, जबकि सितंबर माह में एक लाख 30 हजार खाते में जमा हुए।
पुलिस ने तलाशी के दौरान घर से भी दो लाख रुपये बरामद किए है। एसपी सिटी अजय सिंह का कहना है कि जाहिरा तौर पर सुनील का कोई काम नहीं था। आशंका यही है कि यह रकम साजिश में मदद के बदले मिली है। दोनों खातों को सील कराने की कार्रवाई की जा रही है।