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भाई के खून का बदला लेने के लिए कर दिया खून

Mon, 07 Sep 2015 04:15 PM IST
अनुपम सिंह/ अमर उजाला, काशीपुर
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आपसी रंजिश के चलते भाई की हत्या का बदला लेने के लिए मोहल्ला महेशपुरा निवासी सगीर अहमद उर्फ जगीरा (25 वर्ष) पुत्र कल्लू पल्लेदार की हत्या की गई है।
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काशीपुर पुलिस के मुताबिक महेशपुरा मोहल्ला निवासी कोतवाली क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर बदमाश नईम उर्फ बाबा से किसी जमाने में मृतक सगीर की अच्छी दोस्ती थी। उसका नईम के घर भी जाना-आना लगा रहता था। इसी दौरान सगीर ने 23 जून 2008 को तत्कालीन सांसद केसी सिंह बाबा के सचिव रवि शंकर की छीना फार्म में हत्या कर दी।

उस समय नईम ने सगीर को जेल से छुड़ाने और कोर्ट में पैरवी करने का वादा किया था। मगर जब सगीर जेल चला गया तो नईम अपने वादे से मुकर गया और सगीर की कोई मदद नहीं की। इस वजह से जब वह जेल से छूट करके आया तो वह नईम से रंजिश रखने लगा और बदला लेने की ठान ली।
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लिहाजा जिस मौके की वह लंबे अर्से से तलाश कर रहा था। वह मौका सगीर को पांच अप्रैल 2011 को मिल गया। उस दिन सगीर ने नईम उर्फ बाबा के भाई आरिश की नीरे वाली गली के पास हत्या कर दी। भाई की हत्या होने के बाद से कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर बदमाश नईम खुंदस में था।

लेकिन सगीर के जेल में होने की वजह से वह कुछ कर नहीं पा रहा था। बताया जाता है कि छह महीने पहले ही सगीर जेल से छूटकर आया था।

जिस पर नईम की पहले से ही नजर थी और अब वह उसे मौत के घाट उतारने के मौके की तलाश में था। अपर पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने बताया कि नईम उर्फ बाबा को रविवार को मौका मिल गया और उसने सगीर की हत्या कर दी।

कोर्ट ने कर दिया था सगीर को रिहा
पुलिस के मुताबिक महेशपुरा मोहल्ला निवासी नईम उर्फ बाबा के भाई आरिश की हत्या के आरोप में कोर्ट से मृतक सगीर बरी हो गया था। मगर नईम उर्फ बाबा ने कसम खाई थी, उसे कोर्ट ने भले बरी कर दिया हो, मगर वह भाई की हत्या का बदला जरूर लेगा।

कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर बदमाश है नईम उर्फ बाबा
मृतक सगीर की हत्या का मुख्य आरोपी नईम उर्फ बाबा कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर बदमाश है। जिस पर हत्या, हत्या करने का प्रयास, गैंगेस्टर, लोगों को धमकाने, बलवा करने आदि के कुल 22 मुकदमे दर्ज हैं।
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खंगाला गया रिकॉर्ड
मृतक सगीर की हत्या के बाद कोतवाली में हड़कंप मच गया। कोतवाली पुलिस ने पिछले दस साल का रिकॉर्ड खंगाला। जिसमें पता चला कि नईम पर पहला मुकदमा वर्ष 1997 में अवैध हथियार रखने का दर्ज हुआ था और सगीर पर पहला मुकदमा हत्या करने का एक जून 2006 को दर्ज हुआ था।
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