जिस संपत्ति के लिए देव कुमार सिन्हा ने अपनों से रिश्ता तोड़ लिया था, वही उन्होंने एक नौकर के नाम कर दी...नामुमकिन!
यही कहना है कि सिन्हा के कुछ पड़ोसियों का। उनका कहना है कि इसी संपत्ति के कारण सिन्हा और उनकी बहन का रिश्ता टूटा था। विवाद के बाद अलग हुई बहन और भांजी ने कभी उनकी तरफ मुड़ कर नहीं देखा।
संपत्ति बेचकर गायब हो गया नौकर
बाद में यही संपत्ति सिन्हा की वसीयत के आधार पर उनका नौकर डेढ़ करोड़ रुपए में बेचकर गायब हो गया। सिन्हा की कोठी आईएसबीटी के पास पॉश इलाके टर्नर रोड की लेन नंबर 17-सी में है।
यहां सेना, ओएनजीसी से सेवानिवृत्त अधिकारियों के अलावा पुराने जमींदार परिवार बसे हुए हैं। इस इलाके में बनी बड़ी-बड़ी कोठियों के अंदर अलग ही दुनिया है। यहां पड़ोसी, पड़ोसी को नहीं जानता।
शायद यही वजह है कि डीके सिन्हा के साथ क्या हुआ, वे कहां गए किसी को पता नहीं। न किसी ने जानने की कोशिश की। हालांकि, कुछ पड़ोसी सिन्हा से जुड़ी कुछ बातें जानते हैं।
कई हजार गज जमीन पर बनी है कोठी
कई हजार गज जमीन पर बनी इस कोठी के पीछे सिन्हा और उनकी बहन की कुछ और संपत्तियां थीं। पड़ोसी बताते हैं कि कई बरस पहले सिन्हा के साथ उनकी बहन और भांजी भी रहती थीं।
लेकिन, सिन्हा विवाहित थे या नहीं यह किसी को नहीं मालूम। संपत्ति को लेकर भाई और बहन में ऐसी नाइत्तफाकी हुई कि दोनों ने एक दूसरे की शक्ल न देखने की ठान ली।
बहन अपने हिस्से की संपत्ति बेचकर देहरादून में ही कहीं और जा बसी। सिन्हा ने बहन को मनाने की कोई कोशिश भी नहीं की। नतीजा यह हुआ कि दोनों के बीच नाराजगी की दीवार ऊंची होती चली गई।
ओएनजीसी से सेवानिवृत्त के बाद सिन्हा अलग-थलग पड़ गए। उन्होंने कामकाज के लिए एक महिला को पति के साथ कोठी के एक हिस्से में रख लिया। अब यही गैर उनके अपने थे।
पड़ोसियों के अनुसार सिन्हा अक्सर घूमते हुए नजर आते थे, लेकिन करीब डेढ़ साल पहले वे अचानक गायब हो गए और फिर किसी ने उन्हें नहीं देखा।
कुछ दिन बाद कोठी पर किसी का सामान उतरा तो पता चला कि संपत्ति बिक गई है। कोई नहीं जानता कि सिन्हा अब कहां हैं, वह जीवत हैं या मर गए। लेकिन लोगों को किसी ना किसी अनहोनी की आशंका जरूर है।
बीमारी से हुई थी सिन्हा की मौत!
पुलिस के लिए पहेली बनी ओएनजीसी से रिटायर्ड डीके सिन्हा की मौत की कहानी सुलझती दिख रही है। जांच में खुलासा हुआ कि सिन्हा की मौत ओएनजीसी अस्पताल में उपचार के दौरान हुई थी।
मौत का रिकार्ड शुक्रवार सुबह पुलिस को मिल जाएगा। पूछताछ में इस बात की पुष्टि हुई कि अक्सर अस्पताल की एंबुलेंस उनकी कोठी पर आती रहती थी।
पांच दिन पहले तिहाड़ जेल में बंद सजायाफ्ता लोकेश ने डीजीपी को पत्र भेजकर आरटीआई के तहत डीके सिन्हा की मौत से संबंधित जानकारी मांगी थी।
उसने अपनी पत्नी बबीता और साले राकेश समेत पांच लोगों के खिलाफ संपत्ति हड़पने के लिए सिन्हा की हत्या कर शव गायब करने का आरोप लगाया था। राकेश पत्नी के साथ सिन्हा की कोठी में बतौर केयरटेकर रहता था।
पत्र के आधार पर पुलिस हत्या का मुकदमा दर्ज किया था।
कब क्या हुआ
8 जून-डीजीपी के आदेश पर क्लेमेंटाउन में सिन्हा की हत्या का मुकदमा
9 जून-मुकदमा दर्ज करने के बाद पूरे दिन सिन्हा का पता नहीं लगा सकी पुलिस।
10 जून-ओएनजीसी से सेवानिवृत्त डीके सिन्हा की कोठी को पुलिस ने किया चिह्नित।
11 जून-रजिस्ट्री की कॉपी निकलवाई तो साफ हुआ कि सिन्हा की कोठी राकेश ने वसीयत के आधार पर 2012 में 1 करोड़ 40 लाख रुपए में बेच दी थी। वसीयत की कापी प्राप्त नहीं कर सकी पुलिस।