फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपराध के दलदल में डूब रहा नौनिहालों का भविष्य, 155 किशोर संगीन अपराधों में फंसे

Sat, 15 Jul 2017 10:49 AM IST
धन सिंह बिष्ट/ अमर उजाला, रुद्रपुर
विज्ञापन
minor criminal
विज्ञापन
अपराध की दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले ऊधमसिंह नगर जनपद में किशोर भी आपराधिक वारदात को अंजाम दे रहे हैं। किशोरावस्था में जहां बच्चे अपने भविष्य की नींव रखते हैं, वहीं जिले के सैकड़ों किशोर जरायम की दुनिया में कदम बढ़ा चुके हैं। बीते पांच साल में जिले भर में हुई आपराधिक घटनाओं में डेढ़ सौ से अधिक किशोर शामिल हैं। अपराध के दलदल में धंस चुके इन किशारों ने हत्या, डकैती और लूट जैसी जघन्य वारदात को अंजाम दिया है।
विज्ञापन

 
पुलिस विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 से 16 तक जिले में हुई आपराधिक वारदातों को अंजाम देने में 155 नाबालिग भी शामिल रहे हैं। इन्होंने हत्या, लूट, डकैती और अपहरण जैसी घटनाओं को भी अंजाम दिया है। इनमें काशीपुर के 27 और रुद्रपुर के 20 नाबालिग शामिल हैं। 

ऊधमसिंह नगर के एसएसपी डा. सदानंदा दाते का कहना है कि नाबालिग अपराधी के लिए बाल सुधार गृह बनाए गए हैं। आम तौर पर जब कोई नाबालिग छोटा-मोटा अपराध करते पकड़ा जाता है तो उसके परिजनों के सामने उसकी काउंसलिंग कराई जाती है जिससे वह भविष्य में बड़ा अपराध ना करे। अपराध करने वाला कोई भी किशोर अपने सामाजिक परिवेश से अपराधी बनता है। इसलिए पुलिस के साथ ही समाज के लोगों का दायित्व भी बनता है कि वह किशोरों को अपराध के दलदल से बचाने के लिए अपराध के विरोध में खड़ा हो।
विज्ञापन


फुटेला अस्पताल के मनोचिकित्सक डा.ईष धल्ला का कहना है कि किशोरावस्था में अपराधी बनने के पीछे हर वर्ग के अलग कारण है। कमजोर और मध्यम वर्ग के तबके के किशोर पारिवार की आर्थिक तंगी, नशे और घरेलू कलह के कारण अपराध की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं उच्च वर्ग के किशोर डिप्रेशन, माता-पिता के साथ संवाद में कमी और वेस्टर्न कल्चर की चकाचौंध में पड़कर आपराधिक वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। 

इंटरनेट के गलत इस्तेमाल से भी किशोरों में अपराध की भावना बढ़ रही है। किशोरों की मनोदशा अपराधिक प्रवृति की ना बने इसके लिए माता-पिता को अपने बच्चों को पर्याप्त समय देने के साथ ही उनकी संगत पर भी नजर रखनी चाहिये। बच्चे के जीवन में साक्षरता को प्रमुखता देने पर भी वह अपराध से दूर रहते हैं। आम तौर पर नशा अपराध का सबसे बड़ा कारण हैं। अगर माता-पिता को अपने बच्चे में किसी तरह का बदलाव जैसे चिड़चिड़ापन, गुस्सा, सुस्ती या बदलाव जैसे लक्षण दिखें तो बच्चे को फौरन मनोचिकित्सक को दिखाना चाहिये। 
विज्ञापन


वर्ष 2012 से 16 तक थानावार किशोर अपराधियों की सूची
काशीपुर           27
रुद्रपुर            20
सितारगंज         18
गदरपुर            16
खटीमा           13
पंतनगर           11
किच्छा           11
जसपुर            10
कुंडा               7
बाजपुर            7    
दिनेशपुर           5
ट्रांजिट कैंप       5
नानकमत्ता         5

नाबालिग अपराधियों में टॉप थ्री 
काशीपुर           27
रुद्रपुर              20
सितारगंज           18

इन थाना क्षेत्रों में नहीं दर्ज नहीं कोई बाल अपराधी
केलाखेड़ा
आईटीआई
पुलभट्टा
झनकईया

कब कितने किशोर हुए अपराध में लिप्त

वर्ष 2012 से 2016
2012      37
2013      45
2014      30
2015      40 
2016       3
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें