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दुष्कर्म नहीं कर पाया तो कर दिया सात साल की बच्ची का बुरा हाल, अब जाकर मिली सजा

Tue, 27 Mar 2018 08:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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minor rape
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सात साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म नहीं कर पाया तो उसे तड़पा-तड़पा कर मार डाला। पढ़िए हैवानियत की दास्तान...

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दुष्कर्म के प्रयास में असफल होने पर उसकी हत्या करने वाले अभियुक्त को विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट अपर सत्र न्यायाधीश अर्चना सागर ने आजीवन कारावास और 55 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। एक अन्य को सुबूत मिटाने का दोषी पाते हुए सात वर्ष की कठोर कारावास और दस हजार की जुर्माने की सजा दी गई है।

 शासकीय अधिवक्ता कुशलपाल सिंह चौहान और आदेश चौहान ने बताया कि 15 अप्रैल 2015 को मृतका के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि वह सिडकुल क्षेत्र के एक मकान में किराये पर रहता था। दोपहर में अपनी सात साल की बेटी की हत्या की सूचना पाकर वह मौके पर पहुंचा। बेटी का गला रेतकर हत्या की गई थी। पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की ।

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असफल होने पर उसने दरांती में गला काटकर बच्ची की हत्या कर दी

पुलिस - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
जांच में आरोपी छोटू पुत्र राजाराम मूल निवासी मैगलगंज लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश हाल निवासी दादूपुर रानीपुर कमरे में उसकी सात साल की बेटी को अकेला देख घुस गया था और उसके साथ दुष्कर्म का करना चाहा। असफल होने पर उसने दरांती में गला काटकर उसकी हत्या कर दी थी।

आरोपी ने अपनी खून में सनी हुई कमीज एक अन्य आरोपी पैगाम रसूल पुत्र फरमान अली निवासी खाता खेड़ी मंडी सहारनपुर हाल निवासी सलेमपुर रानीपुर के गोदाम में छिपा दी थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था । सुनवाई के दौरान वादी पक्ष की ओर से 13 गवाहों के बयान कराए गए।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने छोटू को दुष्कर्म का प्रयास करने और हत्या करने व दूसरे अभियुक्त पैगाम रसूल को सुबूत मिटाने का दोषी पाया। छोटू को आजीवन कारावास और 55 हजार के जुर्माने की और अभियुक्त पैगाम रसूल को सात वर्ष के कठोर कारावास और दस हजार की जुर्माने की सजा सुनाई। 
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