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फर्जी कैप्टन बनकर सेना भर्ती के नाम पर ठगे लाखों

Mon, 28 Apr 2014 12:32 AM IST
अमर उजाला, लैंसडौन
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सेना में भर्ती कराने के नाम पर करीब 60 युवकों से लाखों रुपये लेने वाला फर्जी कैप्टन सेना के दो जवानों की सूझबूझ से दबोच लिया गया।
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चार से आठ मार्च तक गौचर में गढ़वाल राइफल्स की भर्ती रैली में शारीरिक नापतौल में सफल उम्मीदवारों की लिखित परीक्षा रविवार को लैंसडौन में होनी थी।

इसी दौरान रिकार्ड कार्यालय में तैनात लांस नायक लक्ष्मण सिंह और राइफल मैन सुदर्शन सिंह को सूचना मिली कि किसी व्यक्ति ने भर्ती कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे लिए हैं।

सच्चाई जानने के लिए छानबीन की गई तो पता चला कि एक व्यक्ति होटल में कैप्टन भगवान सिंह के नाम से ठहरा है। उसने ही पैसे लिए थे।

पचार हजार से डेढ़ लाख रूपए ल‌िए

उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सेना के जवानों ने होटल में पहुंचकर आरोपी को दबोचकर पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी ने अपना नाम हरि किशन बिष्ट निवासी थराली ग्राम कोठी जिला चमोली बताया है।

कहा कि उसने साठ युवकों को विश्वास दिलाया कि भर्ती कराने की जिम्मेदारी उसकी है।

भर्ती के नाम पर पचास हजार से डेढ़ लाख रुपये लिए थे। कुछ युवकों ने पूरे पैसे नहीं दिए, उनसे पैसे लेने वह लैंसडौन आया था। आरोपी के पास 25 युवकों के दस्तावेजों की फोटो कापियां मिली है।

फर्जी ज्वाइनिंग लेटर भी किए थे तैयार

आरोपी के पास से पुलिस ने फर्जी ज्वाइनिंग लेटर भी बरामद किए। वह इन्हें अभ्यर्थियों को थमाकर पैसे लेने वाला था। उसके पास उम्मीदवारों के नाम से फर्जी चिकित्सा प्रमाणपत्र भी थे, जिनमें लैंसडौन के सीएमओ अनिल चौहान का नाम दर्ज था।

जबकि लैंसडौन में न तो सीएमओ का पद है और न ही अनिल चौहान नाम से कोई डाक्टर है। उसने फर्जी एडमिट कार्ड भी तैयार कर किए थे।

बाहर घूमते रहे युवक, अब पछता रहे
आरोपी के आश्वासन पर पैसा देने वाले अभ्यर्थी परीक्षा में नहीं बैठे। ऐसे में अभ्यर्थी परीक्षा में बैठने के बजाय इधर-उधर घूमते रहे। अब ठगी का शिकार होने के बाद युवक पछता रहे हैं कि टेस्ट में बैठे होते तो शायद भर्ती हो जाते।
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आईटीबीपी भर्ती घोटाले में रहा था सस्पेंड

कोतवाल राम सिंह मेहरा के अनुसार आरोपी 2009 में आईटीबीपी भर्ती घोटाले में सस्पेंड रहा। बाद में वह बहाल हो गया था।

उसने खुद को वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश में 15वीं बटालियन में तैनात बताया। बताया कि मुकदमा जिताने वाले वकील को 12 लाख रुपये देने के लिए उसने इस घटना को अंजाम दिया।

ठगों से बचें अभ्यर्थी
ठग के पकड़े जाने के बाद भर्ती कार्यालय के निदेशक कर्नल वीके बग्गल अपनी टीम के साथ कोतवाली पहुंचे। उन्होंने भर्ती के लिए इच्छुक अभ्यर्थियों से अपील की कि वह किसी भी तरह से दलालों के चक्कर में न पड़ें। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होती है।
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