महानिर्वाणी अखाडे़ की भूमि औने-पौने दाम में बेचने का विरोध करने पर प्रॉपर्टी डीलर आशीष शर्मा महंत सुधीर गिरि की हत्या करवाई थी।
हत्या में प्रयुक्त पिस्टल बरामद
एसओजी एवं रुड़की पुलिस ने टुल्ली, मुजफ्फरनगर के दो शूटर और वहीं के एक प्रॉपर्टी डीलर को गिरफ्तार कर लिया है। हत्याकांड में प्रयुक्त पिस्टल, देसी तमंचा और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किया है।
शुक्रवार को मेला नियंत्रण कक्ष में एसएसपी सदानंद दाते ने महंत सुधीर गिरी हत्याकांड का खुलासा किया। बताया कि महंत की हत्या के लिए 9 लाख रुपए की सुपारी दी गई थी।
बताया कि शर्मा कंस्ट्रक्शन कंपनी का स्वामी आशीष शर्मा उर्फ टुल्ली (पुत्र सुभाष चंद्र शर्मा निवासी मोहल्ला म्याना, कनखल, हरिद्वार) कई वर्ष से महानिर्वाणी अखाडे़ में बतौर मुंशी कार्यरत था।
अखाडे़ के संतों से कम दामों में भूमि खरीदकर वह महंगे दामों में बेचता था। कॉलोनियों, अपार्टमेंट और दुकानें आदि बनाकर भी बेचता रहता था।
वर्ष 2004 में संत सुधीर गिरि ने सस्ते रेट में भूमि देने का विरोध किया। दोनों में इस बात को लेकर तकरार भी हुई और आशीष शर्मा को मुंशी पद से हाथ धोना पड़ा।
2006 में टुल्ली ने अखाड़े में वापसी की
वर्ष 2006 में टुल्ली ने फिर मुंशी के तौर पर अखाडे़ में वापसी की। एसएसपी ने बताया कि कुछ समय बाद टुल्ली ने स्वेच्छा से मुंशी पद छोड़ दिया। लेकिन रंजिश बरकरार रही।
टुल्ली ने अपने परिचित प्रॉपर्टी हाजी नौशाद (पुत्र मसीतुल्ला निवासी मॉडल टाउन, सरकुलर रोड, सिविल लाइन, मुजफ्फरनगर) से संपर्क साधा।
उसने टुल्ली की मुलाकात शूटर इमत्याज उर्फ जुगनू (पुत्र अशफाक निवासी खालापार रहमतनगर आजा मॉन्टेसरी स्कूल के पास मुजफ्फरनगर) और महताब उर्फ काला उर्फ शानू (पुत्र अनीस निवासी सूजडडू चुंगी मॉडल टाउन सिविल लाइन मुजफ्फरनगर) से कराई।
2012 में गोलियों से भूनकर कर दी थी
घटना से कई माह पूर्व तक शूटर महताब एवं इमत्याज बतौर ड्राइवर के तौर पर प्रॉपर्टी डीलर टुल्ली के साथ रहे और 14 अप्रैल 2012 को कनखल से पीछा करते हुए बेलड़ा गांव पहुंचने पर कार में सवार महंत सुधीर गिरि की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी।
गुरुवार को कार से देहरादून जा रहे शूटर, उन्हें संरक्षण देने वाले हाजी नौशाद को रुड़की क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। जबकि प्रॉपर्टी डीलर टुल्ली को कनखल से दबोचा है।
प्रेसवार्ता के दौरान एसपी देहात अजय सिंह, एसपी सिटी एसएस पंवार, एसओजी प्रभारी नरेंद्र बिष्ट, एसओजी रुड़की प्रभारी मोहम्मद यासीन मौजूद रहे।