युवती ने 13 फरवरी 16 को पुलिस से शिकायत करनी चाही तो जितेंद्र फिर उसे बहला फुसलाकर गोधरा (गुजरात) अपने चाचा के घर ले गया। यहां पांच माह तक उसने युवती को अपनी हवस का शिकार बनाया और दवा खिलाकर उसका गर्भपात भी करा दिया।
इतना सब कुछ करने के बाद भी जितेंद्र ने युवती को नहीं अपनाया और 15 जुलाई 16 को युवती को गुजरात से अपने गांव तैला लाते समय तीनधारा (देवप्रयाग) में बेहोशी की हालत में छोड़ गया। पीड़िता को जब होश आया तो उसने स्वयं को श्रीनगर में अकेला पाया।
इसके बाद वह जितेंद्र के घर तैला पहुंची, जहां उसके घर वालों ने उसे अपनाने से साफ इंकार कर दिया। इसके बाद पीड़िता द्वारा 14 सितंबर 2016 को जितेंद्र के खिलाफ कोतवाली रुद्रप्रयाग में तहरीर दी गई।
शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुनाया। अदालत ने सभी मौजूद सबूतों, तथ्यों और पीड़िता के बयान के आधार पर जखोली ब्लाक के तैला गांव निवासी जितेंद्र लाल को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। राज्य सरकार की ओर से इस मुकदमे की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता केपी खन्ना ने की।