भाई को राखी बांधने मुजफ्फरनगर से देहरादून पहुंची बहन का पर्स बाइक सवार बदमाशों ने लूट लिया।
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महिला ने शोर मचाया, लेकिन तब तक बाइक सवार अंधेरे का फायदा उठाते हुए भाग निकले। सूचना मिलते ही पुलिस ने सघन चेकिंग अभियान चलाया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पाया।
घटना शनिवार की रात करीब नौ बजे आईएसबीटी के समीप की है। मुजफ्फरनगर निवासी गीता अपने भाई को राखी बांधने दून आई थीं। रोडवेज से सेवानिवृत्त गीता के भाई सेवला खुर्द में रहते हैं।
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रक्षाबंधन के लिए खरीदारी करने निकली थी गीता
शनिवार शाम गीता अपनी भाभी के साथ रक्षाबंधन के लिए खरीदारी करने निकली थीं। रात करीब नौ बजे दोनों पैदल घर लौट रही थीं।
हिमालयन ड्रग फैक्ट्री से महज कुछ कदम आगे अचानक एक बाइक उनके पास आकर रुकी और पीछे बैठे युवक ने गीता का पर्स छीन लिया। गीता ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो पीछे बैठे बदमाश ने गीता का धक्का देकर फरार हो गया।
गीता की भाभी कुछ समझ पाती इससे पहले ही बाइक सवार बदमाश अंधेरे में गुम हो गया। सूचना पर पुलिस और स्थानीय लोगों ने बदमाश की तलाश की, लेकिन सुराग नहीं मिल पाया।
पर्स में गीता का मोबाइल और करीब दो हजार रुपए की नकदी थी।
चोरों ने तोड़े घर के ताले
देहरादून में एनआरआई डॉक्टर के बंद घर के ताले तोड़कर चोरों ने हाथ साफ कर दिया। वारदात के समय मकान की देखभाल करने वाली महिला राखी बांधने अपने परिचितों के घर गई थी।
आरोप है कि सूचना देने के बावजूद पुलिस डेढ़ घंटा देरी से मौके पर पहुंची। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बसंत विहार थाना क्षेत्र में स्थित इंजीनियर्स एन्क्लेव में डॉ. सुनील भट्ट की कोठी है।
डॉ. सुनील परिवार के साथ कनाडा में रहते हैं और उनकी एक परिचित महिला घर की केयर टेकर हैं। रविवार को महिला घर का जायजा लेने के बाद आसपास रहने वाले परिचितों के घर राखी बांधने चली गई।
महज 20 मिनट बाद वह वापस लौटी तो देखा कि घर के ताले टूटे हुए हैं। घर से टीवी व अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण गायब थे। महिला ने इसकी सूचना पड़ोसियों के साथ ही बसंत विहार पुलिस को दी।
पुलिस कुछ देर बाद आई और मौका मुआयना किया। पुलिस ने पूछताछ के लिए दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
आसपास के रहने वाले लोगों ने पुलिस को बताया की एक इंडिका कार उस दौरान घर के बाहर खड़ी हुई थी। शायद चोरी इसी कार में आए थे।
रक्षाबंधन पर उत्तराखंड परिवहन निगम ने बहनों को मुफ्त बस यात्रा का तोहफा दिया था। लेकिन, यह तोहफा मुसीबत साबित हुआ।
यात्रियों की भीड़ के आगे बसों की संख्या कम पड़ गई और कई बहनों को बस ही नहीं मिल पाई। जिन बहनों को बस मिली भी वह भारी भीड़ के बीच धक्के खाते हुए भाई के घर पहुंचीं।
त्योहार के कारण रविवार सुबह से ही आईएसबीटी पर यात्रियों की भारी भीड़ थी। वहीं, हरिद्वार, ऋषिकेश की तरफ जाने वाली बहनें बाईपास रोड, रिस्पना पुल, जोगीवाला में बसों का इंतजार करती रहीं।
बसों में भारी भीड़ होने के कारण कई बहनों को टैक्सी व अन्य डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ा। हालांकि, बस परिचालकों ने महिलाओं को आरक्षित सीट पर बैठाने की पूरी व्यवस्था की।
आईएसबीटी प्रभारी केपी सिंह ने बताया कि यात्रियों की संख्या ज्यादा होने से कुछ परेशानी जरूर हुई।