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ज्वैलथीफ' को छुड़ाने वाले दोस्तों को मिली सजा

Wed, 27 Nov 2013 06:03 PM IST
अमर उजाला, रुड़की
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उत्तराखंड में फिल्मी अंदाज में बड़ी-बड़ी चोरियों को अंजाम देने वाले ज्वैलथीफ अंग्रेज सिंह के तीन साथियों को न्यायालय ने सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। जबकि पर्याप्त साक्ष्यों के आभाव में न्यायालय ने उसके पांच साथियों को बरी कर दिया है।
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2006 की घटना
वर्ष 2006 में अंग्रेज सिंह एवं उसके पांच साथियों को उस समय फिल्मी अंजाद में पुलिस की गाड़ी पर हमला कर छुड़ाया गया था, जब उन्हें कोर्ट की पेशी के बाद वापस जेल लाया जा रहा था।

अंग्रेज सिंह एवं उसके पांच साथियों को पुलिस सात नवंबर 2006 को पेशी के लिए पुलिस वैन से हरिद्वार कोर्ट ले जाया गया था। पेशी के बाद जब उन्हें वापस रुड़की उप-कारागार लाया जा रहा था तो दिल्ली-हरिद्वार हाइवे स्थित बेलड़ी सल्फर के समीप अपराह्न 3 बजे के लगभग एक सफेद रंग की टाटा सूमो ने पुलिस वैन को ओवर टेक कर उसे रुकवा लिया।
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पुलिसकर्मियों की राइफलें भी लूटी
इसके बाद फिल्मी अंदाज में सूमो से निकले बदमाशों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर अंग्रेज सिंह, जरनैल सिंह, कृपाल सिंह, मुख्तियार, हरजेंद्र एवं सोनू को छुड़वा लिया था। साथ ही पुलिसकर्मियों की दो राइफलें भी लूट ली थी। घटना के संबंध में कांस्टेबल सुलेख चंद ने सिविल लाइंस कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।

अंग्रेज सिंह को पुलिस ने कुछ दिन बाद एक मुठभेड़ में मार गिराया था। इस मामले में पुलिस ने अभिरक्षा से फरार हुए सभी आरोपियों को पकड़ लिया था। इसके अलावा उन्हें भगाने के आरोप में अंग्रेज सिंह की दो पत्नियों रतन कौर एवं वचन कौर निवासी फाजिलका जिला-फिरोजपुर (पंजाब), राज सिंह, मंगत सिंह, सोनू हलवाई आदि को गिरफ्तार किया था।

सात साल के कठोर कारावास की सजा
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आलोक पुंडीर ने बताया मुकदमें की सुनवाई अपर जिला जज द्वितीय सुबीर कुमार के न्यायालय में चली। जिसमें मुख्तियार, कृपाल सिंह और हरजेंद्र सिंह को दोष सिद्ध हुआ। तीनों को कोर्ट ने धारा-395 एवं 397 के तहत सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

साथ ही उन पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका है। हालांकि रतन कौर, वचन कौर, सोनू हलवाई, मंगत सिंह एवं राजू सिंह के खिलाफ पुख्ता सबूत न होने की वजह से कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। सोनू का केस हरिद्वार किशोर न्यायालय में स्थानांतरित हो गया था।
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