भ्रूण परीक्षण और गर्भपात मामले में डीएम ने एक नर्सिंग होम को सील किए जाने और अल्ट्रासाउंड मशीन को सीज करने के आदेश दिए हैं। डीएम ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की जाए।
लगभग छह महीने पहले 20 वर्षीय एक अविवाहित युवती ने टर्नर रोड स्थित बौंठियाल नर्सिंग होम में अल्ट्रासाउंड कराया। उसके बाद ईसी रोड स्थित डॉ. नीना चौरसिया के नर्सिंग होम में गर्भपात कराया। किसी ने इसकी शिकायत मानवाधिकार आयोग में की।
26 हफ्ते के गर्भ का गर्भपात
आयोग के निर्देश पर डीएम ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम से मामले की जांच कराई। जांच में पता लगा कि बौंठियाल नर्सिंग होम में पीसीपीएनडीटी एक्ट के नियमों का अनुपालन न करते हुए गर्भ में पल रहे 26 हफ्ते के भ्रूण का परीक्षण किया गया। उसके बाद महज एमबीबीएस डॉ. नीना चौरसिया ने 26 हफ्ते के गर्भ का गर्भपात किया। जबकि एमबीबीएस डाक्टर को महज छह हफ्ते के भ्रूण का ही उपचार करने का अधिकार प्राप्त है।
छह हफ्ते से ज्यादा के भ्रूण को गायनेकोलॉजिस्ट ही उपचारित कर सकती है। 20 हफ्ते के बाद गर्भपात कराना कानूनी अपराध माना जाता है। सिटी मजिस्ट्रेट, सीएमओ और डिप्टी सीएमओ की संयुक्त टीम की जांच में दोष साबित होने पर डीएम ने मैसर्स बौंठियाल नर्सिंग होम की अल्ट्रासाउंड मशीन को सीज करने के साथ ही डॉ. नीना चौरसिया का नर्सिंग होम सील करने को कहा हे। जिलाधिकारी ने डॉ. चौरसिया द्वारा मेडिकल के पेशे के खिलाफ आचरण पर उनके मेडिकल रजिस्ट्रेशन के निरस्तीकरण के लिए भी मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया को पत्र भेजा है।