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किशोरी की दुराचार के बाद गला दबाकर हत्या

Tue, 07 Jan 2014 08:12 PM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
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पथरी क्षेत्र के एक गांव में 13 वर्षीय छात्रा की पुलिस चौकी से कुछ दूर दुराचार के बाद गला घोटकर हत्या कर दी गई। घटना से क्षेत्र में आक्रोश फैल गया।
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चौकी प्रभारी लाइन हाजिर
पोस्टमार्टम के बाद शाम चार बजे जैसे ही शव गांव पहुंचा गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए हरिद्वार-लक्सर मार्ग पर चौकी के सामने जाम लगा दिया।

एसएसपी ने चौकी प्रभारी कुलेंद्र रावत को लाइन हाजिर कर दिया है। शाम करीब पांच बजे पुलिस सुरक्षा में छात्रा का अंतिम संस्कार किया गया।

शीतकालीन अवकाश में आई थी घर
शहर के एक आवासीय स्कूल की कक्षा सात की छात्रा 24 दिसंबर को शीतकालीन अवकाश के चलते पथरी क्षेत्र स्थित अपने गांव आई हुई थी।

मंगलवार सुबह करीब आठ बजे जंगल गई छात्रा आधे घंटे बाद भी जब घर नहीं लौटी तो परिजन खोजबीन में निकले।

दो सौ मीटर की दूरी पर थी चौकी
सूचना पर घटनास्थल से दो सौ मीटर दूर चौकी से पुलिस भी पहुंच गई। करीब दस बजे छात्रा गन्ने के खेत में अचेतावस्था में मिली।

आनन-फानन में सीओ चंद्रमोहन सिंह अपने सरकारी वाहन में छात्रा को लेकर महिला अस्पताल हरिद्वार पहुंचे। जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल पहुंचने से पहले हो चुकी थी मौत
सीएमएस डा. भवानी पाल ने बताया कि किशोरी यहां लाने से पहले दम तोड़ चुकी थी। सूचना पर छात्रा के परिजन, रिश्तेदार व ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे।
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हरिद्वार ग्रामीण विधायक स्वामी यतीश्वरानंद, लक्सर विधायक संजय गुप्ता और बसपा नेता सूरजमल भी जिला अस्पताल पहुंचे और घटना को लेकर पुलिस अधिकारियों से नाराजगी जताई। साथ ही पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।

पोस्टमार्टम में रेप की पुष्टि
नगर पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि पोस्टमार्टम में छात्रा से रेप और गला दबाकर हत्या करने की पुष्टि हुई है। हत्याकांड के संबंध में करीब छह संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है।

खुलासे के लिए सेल गठित
एसएसपी ने बताया कि हत्याकांड के खुलासे के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल गठित कर दिया है। सीओ कनखल चंद्रमोहन सिंह नेगी दस्ते की कमान संभालेंगे। दस्ते में फोरेंसिक, होमीसाइड सेल व एसओजी की टीम शामिल रहेगी।

पोस्टमार्टम न कराने की मांग पर अडे़ परिजन
छात्रा की मौत के बाद भाई व उसके दोस्त पोस्टमार्टम न कराने की मांग पर अड़ गए। पर, बाद में पुलिस अधिकारियों के समझाने बुझाने पर वे पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए।

ख्वाहिश थी पढ़ लिख कर बने काबिल इंसान
पेशे से दिहाड़ी मजदूर पिता की ख्वाहिश थी कि उसकी लाडली पढ़ लिख कर परिवार का नाम समाज में रोशन करें, पर  उनकी ये ख्वाहिश अधूरी ही रह गई। तीन पुत्र होने के बावजूद पिता की उम्मीदें मेधावी लाडली से ही जुड़ी थी। पल भर में उसके सभी अरमान चकनाचूर हो गए।

रोजमर्रा की दिहाड़ी कर परिवार का भरण पोषण करने वाले बदनसीब पिता ने सोचा भी नहीं होगा कि, ये उसकी अपनी लाडली से आखिरी मुलाकात होगी।

घर खर्च में पत्नी भी पति का हाथ बंटाती थी, पर आज वह दिहाड़ी पर नहीं गई। बेटी के दुनिया को अलविदा कह देने की खबर भूचाल से कम नहीं थी।

सुबकते रहे पिता
जिला अस्पताल कैंपस में खडे़ पिता की आंख से आंसू सूख चुके थे। केवल सिसकियां ही बाकी थी, परिवार को हौंसला देने का भी जोश तक नहीं था।

सुबकते हुए पिता ने केवल इतना बोला कि इकलौती बेटी होने पर लाड प्यार में पली बढ़ी थी। अपने से दूर हॉस्टल में भेजने की वजह भी यहीं थी कि पढ़ लिख कर बेटी काबिल इंसान बनेगी। वो कुछ ऐसा कर दिखाएगी कि उनका नाम जग में रोशन हो जाए।

रोती बिलखती मां व बडे़ भाई को ग्रामीण संभालने में जुटे थे, हर किसी की जुबां से दरिंदो के लिए फांसी के बोल फूट रहे थे।

देख तेरा भईया खड़ा है
बहन एक बार आंखे खोल दें। देख तेरा भईया खड़ा है। उठ तू उठती क्यों नहीं है। ये शब्द उस भाई के थे जो अपनी बहन के जिंदा बचने की उम्मीद से महिला अस्पताल लेकर पहुंचा था। पर उसे नहीं पता था कि उसकी लाडली बहन हमेशा के लिए खामोश हो गई है।

गन्ना तोल केन्द्र पर उठाई उंगली
जिला अस्पताल कैंपस में पुलिस अधिकारियों के समक्ष ग्रामीणों ने गन्ना तोल केन्द्र पर उंगली उठाई। ग्रामीण बोले कि, गन्ना तोल केन्द्र पर बाहरी व्यक्ति अक्सर आते जाते है।

घटनास्थल से भी चंद कदम की दूरी पर तोल केन्द्र है। बचाव में बच्ची चीखी चिल्लाई भी होगी, ऐसे में तोल केन्द्र पर किसी ने आवाज न सुनी हो ये असंभव है। सीओ चन्द्रमोहन सिंह ने तुरन्त गन्ना तोल केन्द्र पर सुबह से आए गए हर व्यक्ति को हिरासत में लेने के निर्देश दिए।

संघर्ष किया होगा मासूम ने
घटनास्थल संघर्ष की दास्ता बयां कर रहा है। शौच के स्थान पर मासूम की चप्पल इधर उधर पड़ी थी। उससे करीब सौ कदम दूर गन्ने के खेत से लाश मिली है। साफ है कि मासूम ने कातिलों की मंशा भांप विरोध भी किया होगा।

काश पहले मिल गई होती तो बच जाती जान
सुबह साढे़ आठ बजे करीब मासूम के न लौटने पर परिजन चेते। परिजनों ने ग्रामीणों की मदद से मासूम की खोजबीन शुरु कर दी, पर वे खोजबीन के चक्कर में खेतों के अंदरुनी हिस्से में पहुंच गए जबकि मासूम का शव खेत की शुरुआत में ही पड़ा था।

सुबकते हुए भाई व अन्य ग्रामीण युवकों के पांव मटटी से सने थे। पूछने पर बोले कि, वे किशोरी को गन्ने के खेत के अंदर खोजते रहे। करीब दो घंटे बाद शव उन्हें खेत की शुरुआत से ही मिला। वे बार बार यही बोलते रहे कि यदि किशोरी को पहले ढूंढ लिया होता तब उसकी जान बच जाने के पूरे आसार थे।

बारी बारी से पहुंचते रहे अफसर
घटनास्थल पर बारी बारी से अफसर पहुंचते रहे। सीओ कनखल चन्द्रमोहन सिंह नेगी बालिका के शव को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे ही थे फिर एसपी सिटी सुरजीत सिंह पंवार घटनास्थल पहुंचे। होमीसाइड सेल ने भी घटनास्थल का गहनता से निरीक्षण किया।
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दोपहर डेढ़ बजे एसएसपी राजीव स्वरुप ने जायजा लिया। फिर डीआईजी रेंज अमित सिन्हा भी पहुंच गए। डीआईजी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और ग्रामीणों से भी बातचीत कर हालात सामान्य करने की कोशिश की।
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