देहरादून पुलिस ने उत्तर रेलवे में विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के मास्टर माइंड समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
डीआरएम के कथित पीए समेत चार लोग फरार हैं। गिरोह दून के रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी के परिवार के नौ लोगों से 42 लाख रुपए ठग चुका है। आरोपी डीआरएम आफिस में सर्विस बुक भरवाने और रेलवे अस्पताल में मेडिकल कराने और ट्रेन का पास जारी कर शिकार को फंसाते थे।
गिरोह के पास से रेलवे के अधिकारियों की मुहरों के साथ विभाग के कागजात मिले हैं। पुलिस फर्जीवाड़े में रेलवे अधिकारियों की साठगांठ से इनकार नहीं कर रही है। दून के जीएमएस रोड स्थित रॉक वैली अपार्टमेंट निवासी और रेलवे से रिटायर्ड कर्मचारी शशि प्रसाद बंदूणी ने 10 अक्तूबर को पटेलनगर कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि विजय प्रकाश निवासी सहरसा बिहार उनके संपर्क में आया था।
मधुर संबंध होने के बाद विजय ने उनकी बेटी की रेलवे में टिकट कलेक्टर के नौकरी दिलाने का वादा किया। डीआरएम आफिस में भ्रमण के साथ बंदूणी की बेटी की सर्विस बुक आदि भरवा दी गई। स्पीड पोस्ट से कॉल लेटर भेजा गया।
दिल्ली और मुंबई में साक्षात्कार कराने के साथ ज्वाइनिंग लेटर दिया गया। विश्वास होने पर बंदूणी ने दो बेटियों के अलावा दामाद समेत नौ लोगों की भर्ती का तानाबाना बुन लिया। विजय प्रकाश के जरिये सतीश कुमार निवासी गोपालपुर छपरा (बिहार) आदि को 42 लाख रुपए दे दिए।
रकम देने के बाद पता चला कि उनके साथ छल किया गया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद गिरोह की धरपकड़ के लिए एसपी सिटी अजय सिंह की अगुवाई में टीम गठित की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. सदानंद दाते ने रविवार को गिरोह का खुलासा किया।
बताया कि गिरोह के सरगना सतीश कुमार (हाल पता, जय विहार रनोला नई दिल्ली) और नई दिल्ली के पहाड़ गंज निवासी बैद्यनाथ उर्फ विक्की को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से दो लाख रुपए, रेलवे विभाग की नकली मुहरें और विभाग से संबंधित पत्रावली मिली हैं।
गिरोह में शामिल विजय प्रकाश उर्फ सत्यप्रकाश निवासी सहरसा, गोपाल सिंह निवासी मुंगेर, पंकज कुमार निवासी वैशाली (तीनों बिहार) और ओमवीर सिंह यादव निवासी बुलंदशहर यूपी फरार बताए गए हैं। इनकी तलाश में दबिश चल रही है।