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बैंक फर्जीवाड़े के दोषी को चार साल का कारावास, चार साल से था फरार

Thu, 03 Nov 2016 01:25 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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कोर्ट - फोटो : डेमो फोटो
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बैंक लोन फर्जीवाड़े के दोषी को देहरादून सीबीआई विशेष अदालत ने चार साल की सजा सुनाई है। दोषी पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। दोषी पिछले चार साल से फरार था।
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वर्ष 2012 में आर्यनगर स्थित सेंट्रल बैंक के सहायक महाप्रबंधक सुरेश कुमार रोहिला ने सीबीआई से शिकायत की थी। इसमें बताया कि केशवपुरम (दिल्ली) निवासी उद्योगपति अशोक जैन और उनके कुछ सहयोगियों ने प्रदेश में फैक्ट्री लगाने के नाम पर बैंक में लोन के लिए आवेदन किया।

बैंक के तत्कालीन मैनेजर डीके राठी और पीके जैन की स्वीकृति से पांच अलग-अलग फैक्ट्रियों को 3.63 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत किया गया। कुछ माह बाद बैंक को लोन की किस्त मिलनी बंद हो गई। बैंक ने जांच कराई तो पता लगा कि फैक्ट्रियों का कोई अस्तित्व ही नहीं था।
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उद्योगपति अशोक जैन के कर्मचारी रोमी मल्होत्रा के नाम से भी फर्जी दस्तावेजों पर लोन लिया गया। इस मामले में अदालत ने बैंक मैनेजर डीके राठी, बैंक अधिकारी पीके जैन, फर्जी फैक्ट्री संचालक रण कुमार, रविंद्र कुमार शर्मा और अशोक जैन को दोषी पाते हुए पूर्व में सजा सुनाई थी।

तभी से फरार चल रहे रोमी मल्होत्रा को सीबीआई ने 19 अक्टूबर को पीतमपुरा, दिल्ली से गिरफ्तार किया था। विशेष न्यायाधीश (एंटीकरप्शन सीबीआई) अनुज कुमार संगल की अदालत में मल्होत्रा ने अपना जुर्म स्वीकार किया। जिस पर अदालत ने दोषी रोमी मल्होत्रा को चार साल कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है।
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