हरिद्वार रेलवे स्टेशन से करीब सवा चार माह के एक शिशु का अपहरण कर लिया गया।
रोजगार की तलाश में हरिद्वार पहुंचा परिवार ठिकाना न मिलने पर रेलवे स्टेशन पर ही सो गया था। काफी खोजबीन करने के बाद जब जीआरपी को बच्चे का सुराग नहीं लगा तो उन्होंने अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया।
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के मजलबारा थाना महोबा निवासी एक परिवार के चार लोग मंगलवार रात दस बजे उत्कल ट्रेन से हरिद्वार स्टेशन पर पहुंचे थे। परिवार में बबलू, उसकी पत्नी गीता और चार महीने आठ दिन के दो जुड़वा बच्चे थे।
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इसके अलावा बबलू का बड़ा भाई घनश्याम, उसकी पत्नी गीता और डेढ़ साल का पुत्र भी था। ये लोग रोशनाबाद में रोजगार की तलाश पहुंचे थे। शहर में कोई ठिकाना न होने के कारण परिवार के लोग स्टेशन परिसर में ही खाना खाकर एक पेड़ के नीचे सो गए।
बबलू के अनुसार दोनों जुड़वां बच्चों को उन्होंने बीच में सुला दिया था। थके होने के कारण वह गहरी नींद में थे। सुबह करीब चार बजे एक बच्चा रोने लगा तो गीता की नींद टूटी। उसने एक बच्चा गायब पाया। उसने सभी को जगा दिया। बच्चे के गायब होने से सनसनी फैल गई।
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आनन फानन में मामले की सूचना जीआरपी थाने में दी। मौके पर पहुंचे जीआरपी इंचार्ज जवाहर सिंह राठौर ने बताया कि बबलू की तहरीर पर बच्चे के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया है। बच्चे की हरकी पैड़ी, बस स्टेशन सहित अन्य स्थानों पर तलाश की जा रही है।
मुझे इस बात का अंदेशा ही नहीं था कि हरिद्वार में उसके बच्चे को कोई उठा ले जाएगा।
- गीता, बबलू की पत्नी
पुलिस सतर्कता की खुली पोल
रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ और जीआरपी पुलिस की तैनाती रहती है। लेकिन इस तरह से रात में बच्चा चोरी होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जीआरपी इंचार्ज जवाहर सिंह राठौर का कहना है कि स्टेशन से बाहर निकलने के तीन गेट होने के अलावा प्लेटफार्म नंबर 12 के पास भी रास्ता खुला हुआ है। रेलवे अधिकारियों को कई बार लिखित में भी दिया, लेकिन रेलवे गेट बंद नहीं करता है।
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