देहरादून के पटेलनगर से 2015 में संदिग्ध परिस्थितियों में गायब एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या कर दी गई। हाथ आए शख्स ने अपने बयान में चारों की हत्या किए जाने का गुनाह कबूल कर पुलिस को चौंका दिया है।
हालांकि पुलिस की मुश्किल यह है कि बिना साक्ष्य के उसकी बात कितनी सही मानी जाए। फिलहाल, पुलिस संदिग्ध की निशानदेही पर जंगल की खाक छान रही है, लेकिन साक्ष्य जुटाने की चुनौती बरकरार है। अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्य मिलने के बाद ही किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचा जा सकता है।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले का यह परिवार कई बरस से पटेलनगर क्षेत्र में आशियाना बनाए था। इसी बीच 2015 में इस परिवार के चार सदस्य संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गए। इनमें एक महिला उसके दो बच्चे और उसकी मां रिटायर्ड शिक्षिका शामिल थी।
पहले कही थी गंगा में छलांग लगाने की बात
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घर के मुखिया द्वारा दर्ज कराई गई गुमशुदगी के बाद पुलिस हरकत में आई। परिवार का एक बेटा मुखिया के साथ ही था। पुलिस ने बरामदगी के प्रयास भी किए, लेकिन गुत्थी सुलझने के बजाए उलझती चली गई।
करीब एक साल बाद सास के रिश्तेदारों ने एक शख्स पर संदेह जताते हुए अधिकारियों से शिकायत की थी। पुलिस ने उस शख्स को बुलाकर पूछताछ की थी, जिसमें बताया गया था कि महिला ने बच्चों के साथ हरिद्वार गंगा में छलांग लगा दी थी। बचाने के चक्कर में सास भी कूद गई थी।
पुलिस ने बयान की पुष्टि और लाश बरामदगी को हरिद्वार से लेकर मुरादनगर तक गंगनहर को खंगाला था। इस बीच शुगर रोगी होने के कारण इस शख्स की थाने में तबीयत बिगड़ गई।
पुलिस को चकमा देकर भाग गया था
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फजीहत से बचने के लिए तत्कालीन अफसरों ने उसे छोड़ दिया था। अगले दिन उसे थाने बुलाया गया था, लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर भाग गया। पुलिस तब से ही उसकी तलाश में थी।
काफी प्रयासों के बाद पुलिस उसे हिमाचल प्रदेश से ढूंढकर ले आई। यह शख्स पहले तो ना-नुकुर करता रहा। अब परिवार के गायब चारों सदस्यों की हत्या करने की बात कह रहा है।
पुलिस आरोपी को लेकर उन स्थानों पर छानबीन कर रही है, जहां पर वह लाश फेंकने की कहानी सुना रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी यह कहना मुमकिन नहीं है कि वह कितना सच और कितना झूठ बोल रहा है।