आईजी संजय गुंज्याल ने दून के राजपुर रोड पर फ्लैट बेचने के नाम पर लाखों रुपये ठगने के मामले में दिल्ली की एक दंपति के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए है।
उधर, जमीन को दूसरी बार बेचने के खेल का खुलासा हुआ है। राजपुर रोड निवासी देवदत्त शर्मा ने आईजी संजय गुंज्याल को शिकायती पत्र देकर बताया था कि वर्ष 2011 में श्रीमती सुगुप्ता केसरी पत्नी इस्लामुद्दीन केसरी निवासी एकता एन्क्लेव दिल्ली के राजपुर रोड स्थित पैराडाइज अपार्टमेंट में फ्लैट किराए पर लिया था।
कुछ दिन बाद सुगुप्ता ने आफर दिया कि किराया भरने के बजाए वह फ्लैट को खरीद ले। जून 2012 में लिखित समझौता करते हुए महिला को 20 लाख रुपये का भुगतान करने के साथ पीएनबी के 30 लाख रुपये के लोन को भरने का सौदा तय हो गया। आठ मई 2013 को उसकी रजिस्ट्री होनी थी।
इस दौरान देवदत्त ने 12 लाख रुपये बैंक की किस्त अपने खाते से जमा करा दी। लेकिन रजिस्ट्री कराने के बजाए महिला टरकाती रही। इसी बीच बैंक ने ऋण की किस्त नहीं मिलने पर फ्लैट की कुर्की आदेश प्राप्त कर लिए।
हालांकि जिलाधिकारी के आदेश पर कुर्की को रोक दिया गया। आईजी के निर्देश पर एसआईटी ने जांच की तो आरोप सही पाए गए। उन्होंने पुलिस को सुगुप्ता केसरी और उसके पति इस्लामुद्दीन केसरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए है।
जमीन घोटाले में केस दर्ज करने के निर्देश
टिहरी के ढालवाला निवासी लिखवार सिंह ने शिकायत की थी कि साल 2010 में बेटे के नाम से गढी श्यामपुर में 125 वर्ग मीटर का प्लाट किशोर पैन्यूली से खरीदा था। अक्तूबर 2015 में किसी ने बोर्ड लगा दिया कि यह जमीन सलोचना देवी की है।
छानबीन की गई तो पता चला कि हर्षमणि व्यास ने साल 2007 में जमीन शोभा देवी को बेच दी। बाद में यह जमीन किशोर पैन्यूली ने खरीद कर लिखवार के बेटे को बेच दी।
दाखिल खारिज नहीं होने के कारण हर्षमणि व्यास ने जालसाजी से साल 2010 में यह प्लाट फिर सुलोचना देवी पत्नी भगवान सिंह निवासी लैंसडाउन पौड़ी गढ़वाल को बेच दिया। आईजी ने पुलिस को हर्षमणि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए है।