प्रदेश में बच्चों से भीख मंगवाने वाले गिरोहों की सक्रियता के मद्देनजर शासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। जो भी बच्चों से भीख मंगवाने के मामले में पकड़ा जाएगा उसे पांच साल जेल की हवा खानी पड़ेगी और एक लाख रुपये जुर्माना देना होगा। अगर कोई भीख मंगवाने के लिए बच्चे को अपंग करता है तो उसे सात से 10 साल की जेल और पांच लाख रुपये जुर्माना देना पड़ेगा।
सचिव समाज कल्याण डॉ. भूपिंदर कौर औलख ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आदेश जारी कर दिया है। बच्चों से भीख मंगवाने के दोषी व्यक्तियों के खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम-2015 की धारा 76 (1) के तहत कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को जेल और जुर्माना दोनों दंड भुगतने होंगे।
भिक्षाटन करवाने वाले गिरोहों के शिकार बच्चों की शासन पढ़ाई-लिखाई और रहने की भी व्यवस्था कर रहा है। ऐसे बच्चों के लिए देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और हल्द्वानी में आश्रय गृह की स्थापना के संबंध में भी शासनादेश जारी हो गया है। गिरोह संचालित करने वाले लोगों को चिह्नित करके उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।