उषा ब्रेको कंपनी के सुरक्षा प्रबंध की जांच करने के नाम पर रोपवे पास की डिमांड कर रहे दिल्ली और हरियाणा के तीन नटवरलाल धरे गए। आरोपी खुद को इंडियन डिटेक्टिव अगेंस्ट क्राइम के अधिकारी बता रहे थे। कंपनी अधिकारियों की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।
मंगलवार सुबह करीब पौने 11 बजे रोपवे कंपनी उषा ब्रेको के आगंतुक कक्ष में एक युवक पहुंचा। कक्ष में बैठे कर्मी से युवक ने खुद को इंडियन डिटेक्टिव एगेंटस क्राइम का इंस्पेक्टर बताया। कहा कि उनके एसीपी साहब रोपवे के सुरक्षा प्रबंध की जांच करने के लिए आ रहे हैं। इसके लिए सात पास की जरूरत है।
इसी बीच कथित एसीपी अपने एक साथी के साथ आगंतुक कक्ष में पहुंच गए। कंपनी के सुरक्षा अधिकारी महेंद्र प्रसाद पटवाल ने संदेह पर अपने अधिकारी तरुण सिंघल से उनकी मुलाकात कराई। लेकिन सुरक्षा प्रबंध की जांच की वजह का पता नहीं चल पाया। इस पर रोपवे अधिकारी का संदेह और पुख्ता हुआ।
संदेह पर कंपनी ने पुलिस को सौंपा
रोपवे कर्मचारी तुरंत तीनों को पकड़कर कोतवाली लेकर पहुंचे। पुलिस पूछताछ में कथित एसीपी ने अपना नाम नितिन शर्मा (पुत्र हरिविलास शर्मा निवासी 45/सी एक्सटेंशन नागलोई दिल्ली), कथित इंस्पेक्टर दिवाकर भारद्वाज (पुत्र हरीश निवासी 250 सेक्टर 18 हाउसिंग बोर्ड कालोनी फरीदाबाद हरियाणा) एवं तीसरे ने अपना नाम नितिन शर्मा (पुत्र धर्मवीर निवासी 57 यादव कालोनी बल्लभगढ़ हरियाणा) बताया।
कथित एसीपी नितिन शर्मा ने बताया कि वह इंडियन डिटेक्टिव एगेंटस क्राइम नाम के एनजीओ के अस्सिटेंट कमांड पर्सनल (एसीपी) हैं। विकास एनजीओ के स्पेशल ऑनररी अफसर हैं। जबकि अंकित राणा एनजीओ में ट्रेनिंग ले रहा है।
कथित एसीपी नितिन शर्मा ने बताया कि वह रोपवे में ट्रेनर को ट्रेनिंग दिलाने के लिए आए थे। कोतवाली प्रभारी प्रकाश चंद्र मठपाल ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
सतपाल महाराज के आश्रम में ठहरे
तीनों आरोपी पांच दिन से भाजपा नेता एवं अध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज के प्रेमनगर आश्रम में ठहरे थे। वहां पर भी ठहरने के लिए एनजीओ के लेटरहैड पर एक पत्र दिया गया था। जिसमें बताया गया था कि वह सुरक्षा संबंधी जांच के लिए हरिद्वार आए हैं।
पुलिस बनकर तो नहीं करते वसूली
पुलिस मान रही है कि आरोपी पुलिस बनकर वसूली करता है। ये अब तक कहां-कहां गए हैं। इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। कोतवाली प्रभारी का कहना है कि एनजीओ का सुरक्षा प्रबंध से कोई लेना देना नहीं है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
खुद की भी जासूसी कंपनी
एनजीओ में ट्रेनिंग कर रहा अंकित राणा खुद भी एक जासूसी एजेंसी चलाता है। उसके मुताबिक कई कंपनी उसे जासूसी करने के लिए बुलाती है।
लालबत्ती की गाड़ी थी
तीनों आरोपी एक लाल बत्ती लगी कार में आए थे। उनके कुछ साथी कार में बाहर बैठे हुए थे। पकड़े जाने की सूचना पर कार सवार गाड़ी लेकर फरार हो गए।