गाजियाबाद जिले के दादरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे महेंद्र सिंह भाटी समेत दो लोगों की हत्या में सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व सांसद धर्मपाल यादव (डीपी यादव) समेत चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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डीपी यादव, प्रनीत भाटी और करन यादव पर 1.15 लाख और पाल सिंह उर्फ लक्कड़पाला पर 45 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। डीपी यादव के वकील रूपेंद्र भंडारी ने सजा के खिलाफ उत्तराखंड हाईकोर्ट में अपील करने की बात कही है।
तेरह सितंबर 1992 की शाम गाजियाबाद जिले की दादरी रेलवे क्रासिंग पर विधायक महेंद्र सिंह भाटी की ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी गई थी। हमले में भाटी के साथ कार में सवार उनके साथी उदय प्रकाश आर्य की भी मौत हो गई थी।
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मामले में सीबीआई की ओर से 41 गवाह पेश किए गए। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि विधायक महेंद्र सिंह भाटी साथियों के साथ भंगेल जा रहे थे।
ताबड़तोड़ फायरिंग कर की गई थी हत्या
भंगेल रोड पर रेलवे फाटक बंद होने के कारण भाटी व उनके साथी ट्रेन गुजरने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान हथियारबंद हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी।
भाटी हत्याकांड की जांच पहले स्थानीय पुलिस कर रही थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 1993 में इसकी विवेचना सीबीआई को सौंपी गई। डीपी यादव के प्रभाव को देखते और पीड़ित पक्ष द्वारा उत्तर प्रदेश में निष्पक्ष जांच प्रभावित करने के अंदेशे के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2000 में मामले की जांच सीबीआई देहरादून को सौंप दी।
सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट में पूर्व सांसद डीपी यादव, कुख्यात बदमाश लक्कड़पाला समेत आठ लोगों को आरोपित बनाया गया था। इनमें से चार आरोपियों तेजपाल भाटी, जयपाल सिंह गुज्जर, महाराज सिंह और औलाद अली की पहले मौत हो चुकी है।
सीबीआई के अनुसार पूर्व सांसद डीपी यादव के इशारे पर इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। डीपी यादव ने ही बदमाशों को हथियार और वाहन उपलब्ध कराए थे।
कड़ी सुरक्षा में जेल पहुंचे सभी दोषी
सीबीआई की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने डीपी यादव, प्रनीत भाटी, करन यादव व पाल सिंह उर्फ लक्कड़पाला को 28 फरवरी को दोषी करार दिया था। उसी दिन तीन दोषियों को जेल भेज दिया गया था। डीपी यादव ने सोमवार को कोर्ट में सरेंडर किया था। लक्कड़पाला को आर्म्स एक्ट के तहत भी दंडित किया गया है।
गौरतलब है कि डीपी यादव का बेटा विकास यादव वर्ष 2002 में हुए नीतिश कटारा हत्याकांड में दिल्ली एक जेल में 25 साल की कैद काट रहा है।
सजा सुनाए जाने के बाद चार दोषियों को कड़ी सुरक्षा में पुलिस वैन तक पहुंचाया गया। इस दौरान मीडिया को दूर रखने का पूरा प्रयास किया गया। कोर्ट के मुख्य गेट के बाहर खड़ी पुलिस वैन के आगे और पीछे कई लक्जरी गाड़ियां लगी थीं। पुलिस वैन के साथ ही यह गाड़ियां भी कोर्ट से रवाना हुईं।
भाटी हत्याकांड में सीबीआई की ओर से आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। 22 साल तक चले मामले के विचारण के दौरान तेजपाल भाटी, जयपाल सिह गुज्जर की मौत हो जाने से उनके खिलाफ कार्रवाई वर्ष 206 में अबेट कर दी गई।
तीसरे आरोपित महाराज सिंह की वर्ष 2005 और चौथे आरोपित औलाद अली की वर्ष 2103 में मौत हो गई।
'हत्यारों को मिलनी चाहिए थी फांसी’ ग्रेटर नोएडा। महेंद्र भाटी हत्याकांड में सीबीआई कोर्ट द्वारा दोषियों को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा से लोग संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सरेआम हत्या करने वालों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी।
क्षेत्र के लोग लंबे समय से सीबीआई कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद में थे। ग्रामीणों का कहना है कि डीपी यादव, करण यादव, प्रणीत भाटी और लक्कड पाला को विधायक की हत्या के मामले में फांसी की सजा दी जानी चाहिए थी।
दोषियों को फांसी की सजा के लिए पीड़ित परिवार को सुप्रीम कोर्ट में जाना चाहिए। इसके लिए क्षेत्र के लोग महेंद्र भाटी के परिवार से संपर्क करने का मन बना रहे हैं।