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डीपी यादव के लिए फंदा साबित हुई एके-47, कार

Sun, 01 Mar 2015 02:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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दादरी के विधायक महेंद्र भाटी हत्याकांड में इस्तेमाल की गई सफेद रंग की मारुति कार और एक-47 ही आरोपियों के लिए फंदा साबित हुई।
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अदालत में सीबीआई ने यह साबित किया कि यह कार डीपी यादव ने अपने रिश्तेदार करन सिंह के माध्यम से पाल सिंह उर्फ लक्कड़पाला को उपलब्ध कराई थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार लक्कड़पाला, जयपाल गुज्जर और महिपाल सिंह 13 सितंबर 1992 की शाम इसी कार में तेजपाल भाटी के घर से दादरी रेवले क्रांसिंग की ओर गए थे और करीब पौने सात बजे हत्याकांड को अंजाम दिया।

लक्कड़पाला के बयानों में भी यह सामने आया कि यह कार उसे डीपी यादव ने करन सिंह के माध्यम से उपलब्ध कराई थी। इस कार की सर्विस उसने गुड़गांव के एक सर्विस स्टेशन में कराई थी।
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एक-47 से ही मारी गई गोली

बयान के आधार पर सीबीआई ने सोमको आटोमोबाईल गुड़गांव से मारुति कार (डीएल 4 सीबी 3597) का सर्विस रिकार्ड बरामद किया था।

अदालत में यह भी साबित हुआ कि डीपी यादव के इशारे पर लक्कड़पाला व अन्य आरोपियों ने विधायक महेंद्र भाटी की कार पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। यह भी साबित हुआ कि उदय प्रकाश आर्य के शव और कार से बरामद गोलियां लक्कड़पाला से बरामद एके-47 से चली थीं।

विधायक को था हत्या का अंदेशा
विधायक महेंद्र भाटी को ढाई महीने पहले ही अंदेशा हो गया था कि लक्कड़पाला और महेंद्र फौजी ग्रुप के बदमाश उनकी हत्या कर सकते हैं। विधायक ने थानाध्यक्ष दादरी को पत्र लिखकर इस बात की आशंका जताई थी।
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हो सकता है आजीवन कारावास

वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रशेखर तिवारी के मुताबिक हत्या के दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बचाव पक्ष की ओर से प्रकरण को सत्र न्यायालय में स्थानांतरित करने का प्रार्थना पत्र दिया गया था। शनिवार को सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश राम सिंह की अदालत में इसे खारिज कर दिया।

हथियार देख सहम गए थे लोग
थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में वादी ने कहा कि घटना को बहुत से लोगों ने देखा और अपराधियों को पहचाना, लेकिन हथियारों के डर से कोई बदमाशों को पकड़ने का प्रयास नहीं कर पाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार बदमाशों ने अन्य हथियारों के अलावा हमले में एके 47 का भी इस्तेमाल किया था।

हमले में साइकिल सवार धर्मवीर सिंह के अलावा एक अन्य कार में बैठे ओपी कयाल भी गोली लगने से घायल हुए थे। लक्कड़पाला को 1996 में पेहवा पुलिस ने एक अन्य मामले में गांव धूलगढ़ जिला कुरुक्षेत्र से जयपाल गुज्जर के साथ गिरफ्तार किया था। उसके पास हत्याकांड में इस्तेमाल एके 47 बरामद हुई थी।
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